नए साल के पहले दिन संगम नगरी का राजनीतिक माहौल गहमागहमी वाला रहा। जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए शुक्रवार को हुए नामांकन के बाद एक बार फिर पुराने प्रतिद्वंद्वी और पंचायत चुनाव के दिग्गज आमने-सामने हैं। सपा से रेखा सिंह तो बसपा से केशरी देवी ने पर्चा दाखिल किया। वहीं, तीसरी प्रत्याशी के रूप में अपना दल से बबिता सिंह ने नामांकन पत्र दाखिल किया। इन सबसे इतर सपा नेता शिखा सिंह ने प्रत्याशी रेखा सिंह का प्रस्तावक बन सबको चौंका दिया, क्योंकि एक दिन पहले तक वह सपा की रेखा सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ने को तैयार थीं और उन्होंने नामांकन पत्र भी खरीद लिया था।
फिलहाल शिखा सिंह के नामांकन न कराने से रेखा सिंह के लिए रास्ता साफ हो गया है। साथ ही रेखा सिंह ने उन्हें अपना प्रस्तावक बनाकर यह संदेश देने की कोशिश की है कि अध्यक्ष पद को लेकर पार्टी में कोई खींचतान नहीं है और सबकुछ ठीक चल रहा है। वहीं, पार्टी के सूत्र इससे इतर दावा कर रहे हैं कि यमुनापार से रेखा सिंह को फिर से प्रत्याशी बनाए जाने के कारण गंगापार के सपा समर्थित जिला पंचायत सदस्यों और नेताओं में असंतोष है। इससे पार्टी में भितरघात की स्थिति बनी हुई है। रेखा सिंह के चुनाव पर इसका कितना प्रभाव पड़ेगा, यह सात जनवरी को मतदान और मतगणना पूरी होने के बाद स्पष्ट होगा। फिलहाल रेखा सिंह के सामने पहली और सबसे बड़ी चुनौती अपनी चिर प्रतिद्वंद्वी केशरी देवी पटेल को मात देना है। केशरी देवी कहीं से कमजोर नहीं हैं। दोनों जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुके हैं, सो चुनाव जीतने के हर हथकंडे से अच्छी तरह वाकिफ हैं।
इन सबके बीच अपना दल से अचानक बबिता सिंह का नाम सामने आने के बाद अब दोनों को अपना वोट बैंक बचाने के लिए भी जूझना होगा। आखिरी लड़ाई इन तीनों के बीच होगी या नहीं, यह चार जनवरी को नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद तय होगा लेकिन मौजूदा समीकरण ने जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव को रोमांचक मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है। नामांकन के दौरान सपा की ओर से विधायक अंसार अहमद, डॉ. अजय कुमार, गिरीश चंद्र पांडेय, प्रशांत सिंह सहित तमाम नेता और बसपा की ओर से विधायक दीपक पटेल, पूजा पाल, राजबली जैसल, बसपा के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव इंद्रजीत सरोज, राज्यसभा सदस्य मुनकाद अली आदि मौजूद रहे। दोनों तरफ से भारी जुलूस और बाजे-गाजे के साथ प्रत्याशी नामांकन कराने पहुंचे। इस दौरान आचार संहिता की लगातार अनदेखी होती रही।
सपा नेता और नव निर्वाचित जिला पंचायत सदस्य शिखा सिंह के पैतरे से हर कोई हैरान है। पहले खुद चुनाव लड़ने के लिए नामांकन पत्र खरीदा और 24 घंटे बाद अपनी ही पार्टी की अधिकृत प्रत्याशी रेखा सिंह की प्रस्तावक बन गईं। शुक्रवार को जिला पंचायत परिसर में रेखा सिंह जब नामांकन कराने पहुंचीं तो साथ में शिखा सिंह भी थीं। नामांकन कक्ष में पहुंचने के बाद मालूम हुआ कि शिखा वहां पर्चा दाखिल करने नहीं, बल्कि रेखा सिंह की प्रस्तावक बनकर पहुंची हैं। हालांकि पंचायत चुनाव के जानकारों के मुताबिक चुनाव के दौरान ऐसे पैतरे आम होते हैं।
पहले दबाव बनाना और फिर फायदा कमाकर पीछे हट जाने के कई उदाहरण सामने हैं। यह भी हो सकता है कि इसके पीछे पार्टी की कोई रणनीति रही हो। एक दिन पहले शिखा सिंह का नाम उछालकर पार्टी के अन्य असंतुष्ट नेताओं तक यह संकेत पहुंचा दिया गया कि उन्हें विरोध में किसी प्रत्याशी को चुनाव मैदान में उतारने की जरूरत नहीं है। जब नामांकन पत्र बिक्री की तिथि समाप्त हो गई तो शिखा सिंह के नामांकन न कराने से रेखा सिंह के लिए रास्ता साफ हो गया।