करछना के कचरी और असपास के गांवों में सन्नाटा पसरा हुआ है। ये गांव पूरी तरह से फोर्स के हवाले हैं। प्रस्तावित पावर प्लांट के निर्माण के लिए खड़ी और हरी फसल पर बुल्डोजर चलवाए जा रहे हैं और परेशानहाल किसान अपनी फसल बचाने के लिए पुलिस की लाठियां खा रहे हैं। खेतों पर बुल्डोजर चलने से गेहूं, फसल, मटर की फसलें बर्बाद हो रही हैं। ऐसे में कचरी सहित आसपास के आधा दर्जन गांवों में चिंगारी फिर सुलगने लगी है।
ये वही गांव हैं, जहां पांच साल पहले ग्रामीणों ने पावर प्लांट के विरोध में जमकर बवाल किया था। इलाहाबाद-मिर्जापुर सड़क मार्ग और दिल्ली-हावड़ा रेल रूट जाम कर दिया था। इस मामले में प्रशासन के कई अफसरों को कार्रवाई झेलनी पड़ी थी। इस बार भी प्रशासन का रवैया किसानों के गुस्से को बढ़ा सकता है। कचरी एवं आसपास के गांवों में माहौल काफी तनावपूर्ण है और कई गांवों में प्रशासन ने लोगों के प्रवेश पर ही रोक लगा दी है।
काफी छानबीन और तलाशी के बाद सिर्फ स्थानीय ग्रामीणों को प्रवेश की अनुमति दी जा रही है। वहां सिर्फ सरकारी वाहन दिख रहे हैं या ऐसे वाहन जिनपर पर सत्ता पक्ष के झंडे लगे हैं। चौतरफा फोर्स से घिर गांवों में रहने वालों की स्थित नजरबंद जैसी हो गई है। फिलहाल प्रशासन इस कवायद में है कि प्रस्तावित पावर प्लांट की जमीन पर एक हफ्ते के भीतर जैसे-तैसे चहारदीवारी का निर्माण पूरा करा लिया जाए। शुक्रवार को भी मौके पर डीएम और एसएसपी ने जायजा लिया।