लखनऊ में दस फरवरी को हाईकोर्ट बेंच के पास हुए वकीलों के बवाल, आगजनी और तोड़फोड़ की घटना की जांच पुलिस ही करेगी। हाईकोर्ट ने प्रमुख सचिव गृह को निर्देश दिया है कि वह अपनी निगरानी में घटना निष्पक्ष जांच कराएं और रिपोर्ट 21 मार्च को हाईकोर्ट को सौंपे। 23 फरवरी को वृहदपीठ ने प्रदेश सरकार और बार एसोसिएशन को जांच का मुद्दा और दायरा आपस तय करके बताने के लिए कहा था। शुक्रवार को अवध बार एसोसिएशन के अध्यक्ष ने पुलिस की जांच पर संतोष जताते हुए कहा कि जांच पुलिस द्वारा ही पूरी की जानी चाहिए।
वृहदपीठ इस प्रस्ताव से सहमत थी तथा प्रमुख सचिव गृह को निष्पक्ष जांच कराने का निर्देश दिया। बवाल के दौरान पिस्टल लहराने के आरोपी अधिवक्ता विशाल दीक्षित को भी कुछ शर्तों के साथ माफी दे दी गई है। उनसे पिस्टल जमा करने तथा जांच में सहयोग करने के लिए कहा गया है।
विशाल दीक्षित पर कोर्ट में प्रैक्टिस करने का प्रतिबंध लगाया गया था, जो अब समाप्त कर दिया गया है। हाईकोर्ट की सुरक्षा के मामले में वृहद पीठ ने सुरक्षा उपकरण अब तक स्थापित नहीं करने पर नाराजगी जताई। महाधिवक्ता ने बताया कि सुरक्षा उपकरण पुलिस मुख्यालय में रखे गए हैं। इनको शीघ्र ही स्थापित कर दिया जाएगा। सुरक्षा में लगे पुलिसकर्मियों को भी जल्दी ही हथियार आदि उपलब्ध करा दिए जाएंगे। याचिका पर 21 मार्च को अगली सुनवाई होगी।