चैत्र नवरात्र के आगाज के साथ ही भारतीय जनता पार्टी ने शनिवार को फूलपुर लोकसभा सीट से केशरी देवी पटेल को अपना प्रत्याशी घोषित कर ही दिया। यह पहले से ही माना जा रहा था कि भाजपा फूलपुर किला फतह करने के लिए पिछड़े वर्ग का ही प्रत्याशी घोषित करेगी, ऐसा हुआ भी। हालांकि, केशरी देवी पटेल को एक विशेष रणनीति के तहत ही फूलपुर से उम्मीदवार बनाया गया। या यूं कह लें कि पार्टी ने एक तीर से कई निशाने साधे हैं। केशरी के सहारे भाजपा ने पिछड़े एवं बसपा के वोट बैंक के ध्रुवीकरण की कोशिश की है।
सपा-बसपा गठबंधन की वजह से इस बार का चुनाव जातीय समीकरण साधने पर केंद्रित है। इसी वजह से भाजपा ने विशेष रणनीति के तहत केशरी देवी पटेल को मैदान में उतारकर जातीय समीकरण बनाने की कोशिश की है। एक अनुमान के मुताबिक इस संसदीय सीट में सर्वाधिक साढ़े तीन लाख पटेल मतदाता हैं। इसके अलावा दो लाख ब्राह्मण, दो लाख कायस्थ, वैश्य, 1.5 लाख यादव, तीन लाख एससी, 1.5 लाख मुस्लिम वोटर हैं। इस जातीय समीकरण को देखते हुए भाजपा की ओर से दावेदारी करने वालों में ज्यादातर पिछड़े वर्ग से जुड़े मतदाता ही रहे। हालांकि यहां से कुछ सवर्ण उम्मीदवारों ने भी टिकट के लिए दावा किया था, लेकिन अंत में केशरी देवी के पुराने अनुभव को देखते हुए पार्टी ने उन्हें टिकट देकर चुनाव मैदान में उतारा। दरअसल, केशरी देवी दो बार बसपा के टिकट पर इलाहाबाद और फूलपुर से चुनाव लड़ चुकी हैं।
इस वजह से उनकी बसपा के परंपरागत वोटरों पर खासी पैठ भी है। डिप्टी सीएम केशव मौर्य के गुट में होने की वजह से और खुद पटेल होने के चलते उनकी पिछड़ों में भी अच्छी पकड़ है। फूलपुर लोकसभा क्षेत्र में शहर की भी दो विधानसभा सीटें हैं। शहर उत्तरी भाजपा का गढ़ माना जाता है। पिछले चुनाव में केशव मौर्य ने सर्वाधिक लीड शहर उत्तरी से ही ली थी। ऐसे में भाजपा के परंपरागत वोट का भी केशरी को लाभ मिल सकता है। केशरी के लिए यही तस्वीर शहर पश्चिमी विधानसभा की भी हो सकती है। इस वजह से उनकी दावेदारी अन्य उम्मीदवारों पर भारी पड़ गई। केशरी ने वर्ष 2014 में हुआ चुनाव बसपा के टिकट पर इलाहाबाद संसदीय सीट से लड़ा था। तब मोदी लहर होने के बावजूद केशरी ने 1.62 लाख से ज्यादा मत प्राप्त किए थे।
2004 में केशरी देवी फूलपुर से पहली बार बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ीं। हालांकि, इसमें सपा के टिकट पर अतीक अहमद जीते और केशरी दूसरे स्थान पर आईं। इस चुनाव से ही केशरी खासी सुर्खियों में आ गईं। हालांकि, यह बात अलग है कि वह इसके पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष भी रह चुकी थीं। लेकिन इस चुनाव में उन्होंने सपा के टिकट पर लड़ रहे अतीक अहमद को अच्छी टक्कर दी। तब अतीक अहमद को 2.65 लाख एवं केशरी देवी को 2.01 लाख मत मिले थे।