यह था मामला
याची की ओर से तर्क दिया गया कि वह सासनी तहसील में बतौर सहायक क्लर्क के तौर पर तैनात था। याची पर दूसरे कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार करने और गाली देने का आरोप है। इसके अलावा आरोप था कि वह तहसील परिसर में शराब पीता है। इस आरोप में उसके दो इंक्रीमेंट रोकने का आदेश पारित किया गया। याची के अधिवक्ता हिमांशु गौतम की ओर से तर्क दिया गया कि याची के खिलाफ सही तरीके से जांच नहीं की गई है। क्योंकि आरोप को साबित करने के लिए कोई गवाह नहीं प्रस्तुत हुआ और जांच अधिकारी ने मौखिक बयानों के आधार पर याची के खिलाफ कार्रवाई कर दी, जोकि उत्तर प्रदेश सेवा नियम 1999 के नियम सात का उल्लंघन है।
तर्क दिया कि जांच अधिकारी ने याची को जांच के पहले ही आरोप पत्र पकड़ाते हुए प्रतिकूल आदेश पारित कर इंक्रीमेंट रोक दिया। एसडीएम हरी शंकर यादव के इस आदेश पर डीएम हाथरस प्रवीण कुमार लक्षकार और कमिश्नर अलीगढ़ गौरव दयाल ने भी अपनी मुहर लगा दी। याची ने अधिकारियों द्वारा पारित आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी और इसे यूपी गवर्नमेंट सर्वेंट्स (डिसप्लिन एंड अपीलद्ध रूल 1999) के आदेश का उल्लंघन बताया। कोर्ट ने भी पाया कि इन अधिकारियों ने नियमों को ताक पर रखते हुए आदेश पारित किया जो कि सही नहीं है।