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UP : कदाचार के आरोप में तीन एडीजे को बर्खास्त करने की संस्तुति, दो अफसरों को समिति ने किया दोषमुक्त

Sun, 22 May 2022 01:17 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा के जिन अधिकारियों को न्यायिक कदाचार का दोषी पाया गया है, उनमें अशोक कुमार सिंह षष्ठम एडीजे, हिमांशु भटनागर अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश व डॉ. राकेश कुमार नैन विशेष न्यायाधीश अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम शामिल हैं।
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हाईकोर्ट। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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हाईकोर्ट की प्रशासनिक समिति ने तीन एडीजे को कदाचार का दोषी पाते हुए इनकी बर्खास्तगी की संस्तुति राज्यपाल को भेजी है। हालांकि तीनों न्यायिक अधिकारियों पर कार्रवाई की अभी अधिसूचना जारी नहीं की गई है, उम्मीद है कि इसे शीघ्र जारी कर दिया जाएगा। प्रशासनिक समिति ने पांच न्यायिक अधिकारियों पर लगे कदाचार के आरोपों पर विचार किया।

 

 

आरोपों की पुष्टि होने के बाद तीन एडीजे रैंक के न्यायिक अधिकारियों की सेवाएं समाप्त करने की संस्तुति राज्यपाल को भेजी गई है। शेष दो न्यायिक अधिकारियों पर लगे आरोपों पर विचार करने के बाद उन्हें दोषमुक्त कर दिया गया।

 

 

उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा के जिन अधिकारियों को न्यायिक कदाचार का दोषी पाया गया है, उनमें अशोक कुमार सिंह षष्ठम एडीजे, हिमांशु भटनागर अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश व डॉ. राकेश कुमार नैन विशेष न्यायाधीश अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम शामिल हैं।

 

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आरोपों की जांच के बाद लिया गया निर्णय

अशोक कुमार सिंह को 28 मार्च 2001 में अतिरिक्त सिविल जज जूनियर डिवीजन गाजीपुर के रूप में नियुक्त किया गया था। इसके बाद  4 जुलाई 2015 को उन्हें अतिरिक्त जिला और सत्र न्यायाधीश बदायूं के रूप में नियुक्त किया गया। 11 जुलाई 2015 को उन्हें निलंबित कर दिया गया था।
 
 
हिमांशु भटनागर को 19 मार्च 1996 को अतिरिक्त सिविल जज ,जूनियर डिवीजन के रूप में नियुक्त किया गया और 16 अप्रैल 2021 को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, बलिया के रूप में नियुक्त किया गया। डॉ. राकेश कुमार नैन 11 अगस्त 1999 को प्रदेश की न्यायिक सेवा में आए। वह विशेष न्यायाधीश अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम सिद्धार्थनगर रहे हैं।
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