इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एयरफोर्स के पूर्व सैनिकों को सस्ते आवास देने वाली सोसायटी एयरफोर्स नेवल हाउसिंग बोर्ड पर रेरा अथॉरिटी द्वारा की गई कार्रवाई के खिलाफ याचिकाएं खारिज कर दी हैं। कोर्ट ने कहा कि अपीलार्थी सोसायटी रियल इस्टेट में काम कर रही है। प्रमोटर के तौर पर प्रोजेक्ट पंजीकृत कराया है। इसलिए अथॉरिटी के आदेश के खिलाफ अपील दाखिल करने से पहले प्री डिपाजिट बाध्यकारी है।
कोर्ट ने रेरा अथॉरिटी द्वारा प्रोजेक्ट पूरा करने में देरी पर कुछ खरीदारों को ब्याज सहित जमा पैसा वापस करने और कुछ को जमा पैसे पर कब्जा सौंपने तक की अवधि का ब्याज के भुगतान करने का निर्देश दिया है। इसके खिलाफ अधिकरण में अपील की गई। दोनों आदेशों को हाईकोर्ट में रेरा कानून के तहत अपील में चुनौती दी गई। जिस पर कोर्ट ने हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने एयरफोर्स नेवल हाउसिंग बोर्ड, मेरठ की अपील को खारिज करते हुए दिया है।
अपीलार्थी सोसायटी का कहना था कि वह नो प्रॉफिट नो लॉस के सिद्धांत पर सेवानिवृत्त सैनिकों को सस्ते आवास मुहैया करा रही है। वह लाभ नहीं कमा रही है। उसे प्री डिपाजिट के लिए बाध्य न किया जाए।
मेरठ विकास प्राधिकरण ने याची सोसायटी को पांच टॉवर बनाने की अनुमति दी, जिसमें 545 फ्लैट बनने थे। इसमें से 418 लोगों को 523 फ्लैट बेचे गए। 23 फ्लैट तैयार नहीं हो पाए। खरीदने वालों ने रेरा अथॉरिटी से शिकायत की, जिसने ब्याज सहित धन वापस करने या कब्जा देने तक का ब्याज देने का निर्देश दिया।