पुलिस टीम को कन्हैया यादव नहीं मिला तो परिवार के सदस्यों की जमकर पिटाई की, जिसमें 21 वर्षीय छात्रा निशा यादव की पुलिस पिटाई से मौके पर ही मौत हो गई। भाई (याची) का चालान कर दिया गया। बहन गुंजा यादव की तरफ से एफआईआर दर्ज कराने के लिए तहरीर दी गई, किंतु उसे दर्ज नहीं किया गया। लोगों ने हाईवे जाम कर दिया। याची जमानत पर रिहा हुआ तो दूसरे दिन दो मई को पुलिस कर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।
सरकार ने पुलिस के खिलाफ केस की जांच सीबीसीआईडी को सौंप दी। तीन डॉक्टरों की टीम ने पोस्टमार्टम किया, किंतु मृत्यु का कारण नहीं पता चला। मृतका के शरीर पर चोटें व गले में आधे फंदे के निशान के फोटोग्राफ सहित अन्य सबूतों के आधार पर पुलिस पर हत्या करने का परिवार ने आरोप लगाया है। याची का कहना है कि मामले की जांच हाईकोर्ट के जज, एसआईटी या सीबीआई से कराई जाए। साथ ही मृतका के परिवार को 25 लाख रुपये का मुआवजा दिलाने की भी मांग की गई है।