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यूपी: जब तक पूरे न हों फेरे सात, तब तक वैध नहीं विवाह... इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक मामले में की टिप्पणी

Fri, 06 Oct 2023 09:48 AM IST
आकाश दुबे संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज

सार

कोर्ट ने कहा कि हिंदू विवाह की वैधता को स्थापित करने के लिए सप्तपदी एक अनिवार्य तत्व है। वर्तमान मामले में इसका कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं है। यह स्पष्ट है कि सिर्फ याची को परेशान करने के उद्देश्य से दूषित न्यायिक प्रक्रिया शुरू की गई है, जो अदालत की प्रक्रिया का दुरुपयोग है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि हिंदू विवाह में वैधता स्थापित करने के लिए सप्तपदी (सात वचनों के सात फेरे) अनिवार्य तत्व हैं। सभी रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुए विवाह समारोह को ही कानून की नजर में वैध विवाह माना जा सकता है। यदि ऐसा नहीं है तो विवाह शून्य है। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति संजय कुमार सिंह की अदालत ने याची स्मृति सिंह उर्फ मौसमी सिंह के विरुद्ध निचली अदालत द्वारा जारी समन को रद्द करते हुए की।

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याची के विरुद्ध उसके पति और ससुराल वालों ने बिना तलाक लिए दूसरा विवाह करने का आरोप लगाया था। वाराणसी जिला अदालत ने परिवाद का संज्ञान लेते हुए याची के विरुद्ध सम्मन जारी कर अदालत में पेश होने का आदेश दिया था। याची ने सम्मन और परिवाद को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

याची का कहना था कि उसका विवाह पांच जून 2017 को सत्यम सिंह के साथ हुआ था। कुछ समय बाद दोनों में आपसी मतभेद पैदा हो गए। इस कारण याची ने पति और ससुराल वालों के खिलाफ दहेज उत्पीड़न व मारपीट की धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया। आरोप लगाया कि ससुराल वालों ने उसे मारपीट कर घर से निकाल दिया। इस मामले में पुलिस पति व ससुराल वालों के खिलाफ विचारण न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल कर चुकी है।

याची ने दलील दी कि पति द्वारा दाखिल परिवाद में विवाह समारोह संपन्न होने का कोई साक्ष्य नहीं दिया गया है। न हीं सप्तपदी का कोई साक्ष्य है, जो हिंदू विवाह की अनिवार्य रस्म है। एकमात्र साक्ष्य के तौर पर फोटोग्राफ लगाया गया है, जिसमें लड़की का चेहरा स्पष्ट नहीं है। दूसरे विवाह का आरोप सरासर गलत है। यह आरोप याची की ओर से दर्ज कराए गए दहेज उत्पीड़न के मुकदमे का बदला लेने की नीयत से लगाया गया है।

गौरतलब है कि याची के पति और ससुराल वालों ने पुलिस अधिकारियों को एक शिकायती पत्र देकर आरोप लगाया था कि पहले पति से तलाक लिए बिना याची ने दूसरी शादी रचा ली है। सीओ सदर मिर्जापुर ने मामले जांच की तो शिकायत झूठी निकली। इसके बाद पति सत्यम सिंह ने वाराणसी के जिला न्यायालय में परिवाद दाखिल कर दिया।
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दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने कहा कि हिंदू विवाह की वैधता को स्थापित करने के लिए सप्तपदी एक अनिवार्य तत्व है। वर्तमान मामले में इसका कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं है। यह स्पष्ट है कि सिर्फ याची को परेशान करने के उद्देश्य से दूषित न्यायिक प्रक्रिया शुरू की गई है, जो अदालत की प्रक्रिया का दुरुपयोग है। अदालत का यह दायित्व है कि वह निर्दोष लोगों को ऐसी प्रक्रिया से बचाए। कोर्ट ने वाराणसी की अदालत द्वारा 21 अप्रैल 2022 को याची के विरुद्ध जारी सम्मन और परिवाद की कार्यवाही को रद्द कर दिया है।
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