याची की ओर से तर्क दिया गया कि वह भर्ती परीक्षा में सफल हुआ और उसे दस्तावेज सत्यापन कर नैनी जेल में नियुक्ति दी गई। इसके खिलाफ एफआइआर दर्ज थी। जिसकी जानकारी चरित्र प्रमाणपत्र के साथ दी गई थी। इसके बावजूद उसे कारण बताओ नोटिस जारी की गई। अपने जवाब में साफ कहा आपराधिक केस की जानकारी दी गई है।
हाईकोर्ट ने जेल वार्डर केंद्रीय कारागार नैनी प्रयागराज की बर्खास्तगी आदेश के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। याचिका की सुनवाई 24 मई को होगी। यह आदेश न्यायमूर्ति राजीव मिश्र ने सुनील यादव की याचिका पर दिया है।
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याची की ओर से तर्क दिया गया कि वह भर्ती परीक्षा में सफल हुआ और उसे दस्तावेज सत्यापन कर नैनी जेल में नियुक्ति दी गई। इसके खिलाफ एफआइआर दर्ज थी। जिसकी जानकारी चरित्र प्रमाणपत्र के साथ दी गई थी। इसके बावजूद उसे कारण बताओ नोटिस जारी की गई। अपने जवाब में साफ कहा आपराधिक केस की जानकारी दी गई है।
एसीजेएम वाराणसी की अदालत में केस दर्ज है। कोई तथ्य छिपाया नहीं है। इसके बावजूद सेवा से हटा दिया गया है। याची का कहना है कि अवतार सिंह केस में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि केवल केस दर्ज होने से किसी को हटाया नहीं जा सकता। बशर्ते उसने तथ्य छिपाया नहीं हो।