डीएम ने आदेश का नहीं किया पालन
अदालत ने आवेदकों द्वारा 1996 से दी गई सेवाओं की गणना कर पेंशन भुगतान करने का निर्देश दिया था। जब अदालत के इस आदेश का अनुपालन नहीं किया गया तो याचिकाकर्ताओं ने यह अवमानना याचिका दायर की, जिस पर अदालत ने 11 फरवरी 2022 को विरोधियों को नोटिस जारी किया था। इस पर एक अनुपालन हलफनामा दाखिल किया गया, जिसमें मथुरा के डीएम द्वारा 18 अप्रैल 2022 को पारित आदेश की प्रति संलग्न की गई। आदेश में याचिकाकर्ताओं को सेवा का लाभ देने से मना किया गया है।
अवमानना याचिका की 26 अप्रैल 2022 को सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा, यह बहुत हैरान करने वाली बात है कि इस अदालत द्वारा स्पष्ट आदेश के बावजूद जिलाधिकारी ने अदालत के आदेश को अनदेखा किया। यह अपेक्षित है कि जिलाधिकारी को कानून के मूल सिद्धांत की जानकारी होनी चाहिए कि जब तक आदेश पर स्थगन न हो, वह आदेश प्रभावी रहेगा और अधिकारी उस आदेश का पालन करने को बाध्य हैं।
अदालत ने कहा, इस तथ्य के बावजूद मथुरा के डीएम ने जानबूझकर 18 अप्रैल 2022 को आदेश पारित किया, जो कि जिलाधिकारी की ओर से अधिकार का दुरुपयोग और इस अदालत के आदेश का अपमान है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 12 मई की तारीफ निर्धारित की है।