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Allahabad High Court : यौन उत्पीड़न की शिकायतें सिर्फ विलंब के आधार पर खारिज नहीं की जा सकती

Sat, 27 Jun 2026 02:46 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की शिकायतें कई बार परिस्थितियों के कारण देर से दर्ज होती हैं। ऐसे में केवल शिकायत में हुई देरी को आधार बनाकर उसे खारिज नहीं किया जा सकता।
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अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की शिकायतें कई बार परिस्थितियों के कारण देर से दर्ज होती हैं। ऐसे में केवल शिकायत में हुई देरी को आधार बनाकर उसे खारिज नहीं किया जा सकता। यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की एकल पीठ ने एचआरआई के एसोसिएट प्रोफेसर की याचिका पर दिया। मामला प्रयागराज के हरीश चंद्र अनुसंधान संस्थान (एचआरआई) के एक एसोसिएट प्रोफेसर के खिलाफ उनकी पूर्व शोधार्थियों की ओर से लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों से जुड़ा है।

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शिकायतों की जांच के बाद आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) ने प्रोफेसर को दोषी मानते हुए उन्हें चेतावनी दी थी। भविष्य में किसी महिला शोधार्थी या रिसर्च असिस्टेंट का मार्गदर्शन करने पर रोक लगा दी थी। इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए प्रोफेसर ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि शिकायतें कथित घटनाओं के करीब छह माह बाद दाखिल की गईं, जबकि यौन उत्पीड़न से संरक्षण (पॉश) कानून में सामान्यतः तीन माह के भीतर शिकायत करने का प्रावधान है। जांच के दौरान उन्हें शिकायतों और गवाहों के बयानों की प्रतियां उपलब्ध नहीं कराई गईं।

कोर्ट ने कहा कि पॉश कानून का उद्देश्य पीड़ित महिलाओं को प्रभावी और सुरक्षित शिकायत तंत्र उपलब्ध कराना है। इसलिए यदि शिकायत दर्ज करने में देरी हुई है तो पहले उसके कारणों का आकलन किया जाना चाहिए। हालांकि कोर्ट ने आईसीसी के आदेश को निरस्त कर दिया। साथ ही फिर से विचार के लिए समिति को भेज दिया।

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