पैसा जारी करे के बावजूद नहीं दिया गया 17 हजार मानदेय
लखनऊ से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये वहां के वरिष्ठ अधिवक्ता एलपी मिश्रा तथा इलाहाबाद हाईकोर्ट से अपर महाधिवक्ता एमसी चतुर्वेदी इस मामले में सरकार की तरफ से उपस्थित रहे। सरकार का कहना है कि अनुदेशकों की नियुक्ति संविदा के आधार पर की गई है और ऐसे में संविदा में दी गईं शर्तें और मानदेय उन पर लागू होगा। कहा गया कि केंद्र सरकार ने इस मद में आवश्यकतानुसार पैसा राज्य सरकार को अपने अंश का नहीं दिया है। ऐसे में सरकार अपने स्तर से अनुदेशकों को भुगतान कर रही है।
अनुदेशकों की तरफ से कहा गया कि केंद्र सरकार ने अपनी योजना के तहत परिषदीय विद्यालयों के उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत अनुदेशकों का मानदेय 2017 में 17 हजार कर दिया था। यह भी कहा गया कि केंद्र सरकार द्वारा पैसा जारी करने के बावजूद उनको 17000 प्रतिमाह की दर से मानदेय नहीं दिया जा रहा है, जो गलत है। कोर्ट अब इन अपीलों पर 24 मई को सुनवाई करेगी।