फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Prayagraj: मायाराम पटेल की याचिका पर कोर्ट ने दिया फैसला, हाईकोर्ट ने कहा, कानून के आधार पर करें समाधान

Sun, 10 Dec 2023 11:14 PM IST
श्याम जी. अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

राजस्व की जमीन पर अवैध कब्जा कर उस पर व्यक्तिगत रुप से मकान और विद्यालय का निर्माण कर लिया गया है। याची के अधिवक्ता कन्हैयालाल, जीशान सिद्दीकी व इफ्तिखार फारुकी ने दलीलों को प्रस्तुत किया।
 
विज्ञापन
कोर्ट - फोटो : अमर उजाला।
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

लालगोपालगंज कस्बा के इब्राहिमपुर निवासी मायाराम पटेल की याचिका पर हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि कानून के आधार पर विवादित भूमि का समाधान करें। नगर पंचायत क्षेत्र के ग्राम सभा इब्राहिमपुर स्थित सरकारी भूमि गाटा संख्या 49, 51 और 65 को लेकर मायाराम पटेल ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की थी।

विज्ञापन


राजस्व की जमीन पर अवैध कब्जा कर उसपर व्यक्तिगत रुप से मकान और विद्यालय का निर्माण कर लिया गया है। याची के अधिवक्ता कन्हैयालाल, जीशान सिद्दीकी व इफ्तिखार फारुकी ने दलीलों को प्रस्तुत किया। जस्टिस चन्द्र कुमार राय ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की दलीलों को सुनते हुए अहम फैसला सुनाया। कोर्ट ने तहसीलदार सोरांव को निर्देश दिया कि कानून के अनुसार समस्या का निस्तारण करें। कोर्ट ने तीन माह में जवाब दाखिल करने को कहा है।

वहीं, एक दूसरे मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि वैवाहिक दुष्कर्म में आरोपी होने से व्यक्ति की सुरक्षा उन मामलों में जारी रहती है, जहां पत्नी की उम्र 18 वर्ष या उससे अधिक है। अदालत ने इंडिपेंडेंट थॉट बनाम यूनियन ऑफ इंडिया (2017) के मामले में फैसले का भी हवाला दिया। जहां सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि 15 से 18 साल की उम्र के पुरुष और उसकी पत्नी के बीच कोई भी यौन संबंध दुष्कर्म होगा।
विज्ञापन


न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायण मिश्रा ने अपनी पत्नी के साथ कथित तौर पर अप्राकृतिक यौन संबंध बनाने के लिए आईपीसी की धारा 377 के तहत एक पति को बरी करते हुए कहा कि आईपीसी की धारा 377 के तहत शामिल अप्राकृतिक यौन संबंध के घटक आईपीसी की धारा 375(ए) में शामिल हैं। जैसा की मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में देखा गया था।

अपने आदेश में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने कहा था कि दुष्कर्म से संबंधित आईपीसी की धारा 375 (2013 संशोधन अधिनियम द्वारा संशोधित) में लिंग के प्रवेश के सभी संभावित हिस्से शामिल हैं। जब इस तरह के कृत्य के लिए सहमति महत्वहीन है, तो आईपीसी की धारा 377 के अपराध के लिए आकर्षित होने की कोई गुंजाइश नहीं है जहां पति और पत्नी यौन कृत्यों में शामिल हों।

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें