आरुषि-हेमराज हत्याकांड पर हाईकोर्ट का फैसला सुनने के लिए अदालत के भीतर और बाहर हर उस शख्स की सांसें थमी रहीं, जो इस केस से जरा सा भी सरोकार या दिलचस्पी रखता था। कोर्ट नंबर 40 में फैसला पहले दो बजे सुनाया जाना था। इसे जानने की उत्सुकता में डेढ़ बजे से ही वकील जमा होने लगे। दो बजते-बजते पूरा कोर्ट रूम और उसके बाहर का गलियारा खचाखच भर गया। जिनको कोर्ट रूम में घुसने की जगह नहीं मिली वह कॉरिडोर और मार्बल हॉल में जमा हो गए। दो बजकर आठ मिनट पर बेंच सेक्रेटरी ने बताया कि अदालत दो बजकर 45 मिनट पर बैठेगी। इसके बाद भी लोग उत्सुकतावश कोर्ट में जमे रहे।
जस्टिस बीके नारायण और जस्टिस अरविंद कुमार मिश्र की पीठ ठीक दो बजकर 40 मिनट पर कोर्ट में पहुंची। अदालत इतनी ठसाठस भरी थी कि फैसले की कॉपी लाने वाले हाईकोर्ट कर्मचारी को भी भीतर आने की जगह नहीं मिली तो उनको न्यायाधीश के दरवाजे से भीतर लाया गया। दो सरकारी वकीलों को भी बगल के दरवाजे से प्रवेश करना पड़ा। लगभग दस मिनट तक पीठ के दोनों न्यायाधीशों ने आपस में विचार विमर्श करने के बाद दो बजकर 50 मिनट पर निर्णय पढ़ना शुरू किया। लगभग 260 पृष्ठ के फैसले में बेंच की अध्यक्षता कर रहे जस्टिस बीके नारायण ने अंतिम के दो पेज में ऑपरेटिंग पोर्सन को पढ़कर सुनाया। उन्होंने तलवार दंपति को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त करते हुए जेल से बरी करने का आदेश दिया।
कोर्ट का फैसला सुनते ही अदालत में मौजूद तलवार दंपति के वकीलों और उनके परिचितों के चेहरे पर खुशी छा गई। दर्शक दीर्घा में बैठे में आरुषि केस पर किताब लिखने वाले औरिक सेन और राजेश तलवार के दोस्त सत्येंद्र रेखी के चेहरे भी खुशी से चमक उठे। एक-दूसरे से हाथ मिलाते हुए बधाईयां दी जानी लगीं।
हाईकोर्ट के बाहर गेट संख्या तीन के सामने सुबह नौ बजे से ही इलेक्ट्रानिक मीडिया का जमावड़ा था। हर कोई पल-पल का हाल जानने के लिए बेताब था। कोर्ट के भीतर मौजूद परिचित वकीलों से केस का हाल जाना जा रहा था। फैसला आते ही कई अधिवक्ता बाहर की ओर दौड़ पड़े। अधिवक्ता तनवीर अहमद मीर और दिलीप कुमार ने गेट से बाहर आकर पत्रकारों को कोर्ट के फैसले से अवगत कराया।