पांच सितंबर से होने वाली स्पर्धा में अगर अनुष्का पदक जीतती हैं तो वह 30 अक्तूबर से छह नवंबर तक साउथ कोरिया की राजधानी सिओल में आयोजित होने वाली वर्ल्ड बॉडी बिल्डिंग प्रतियोगिता के लिए क्वालीफाई कर लेंगी।
बॉडीबिल्डिंग शब्द सुन कर दिमाग में हट्टे-कट्टे मसल्स वाले पुरुषों की छवि उभरती है। यह पेशा हमेशा से पुरुष प्रधान माना गया लेकिन प्रयागराज की अनुष्का गोस्वामी इन भ्रांति को तोड़ दिया। बॉडीबिल्डिंग में वह एक के बाद एक कीर्तिमान स्थापित कर रहीं हैं। वह 54वीं एशियन महिला बॉडीबिल्डिंग प्रतियोगिता में दमखम दिखाने काठमांडू पहुंच चुकी हैं।
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पांच सितंबर से होने वाली स्पर्धा में अगर अनुष्का पदक जीतती हैं तो वह 30 अक्तूबर से छह नवंबर तक साउथ कोरिया की राजधानी सिओल में आयोजित होने वाली वर्ल्ड बॉडी बिल्डिंग प्रतियोगिता के लिए क्वालीफाई कर लेंगी। इससे पहले एशिया बॉडीबिल्डिंग प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली अनुष्का प्रदेश की पहली महिला बॉडीबिल्डर बन चुकीं हैं। वह इससे पहले गाजियाबाद और सहारनपुर में आयोजित हुई राज्य स्तरीय बॉडी बिल्डिंग प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक और गोवा में आयोजित हुई राष्ट्रीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक अपने नाम कर चुकी हैं।
अनुष्का ने बताया कि शुरुआत में उनके सामने कई चुनौतियां आईं। बॉडीबिल्डिंग करते समय बिकनी पहननी होती है। इसके लिए घरवाले तैयार ही नहीं हो रहे थे। बड़ी मुश्किल से माने। इसके बाद घरवालों के सपोर्ट से इसमें मेहनत किया। उनके पिता ओमकार गोस्वामी सेना में हैं जबकि, मां गीता गोस्वामी गृहिणी हैं। अनुष्का बताती हैं कि दोनों बेहद खुश हैं कि उनकी बेटी एशियन स्पर्धा का हिस्सा बन चुकी है। कोच ओसामा भी उनका हौसला बढ़ाने के लिए नेपाल पहुंचे हैं।