मां की संदिग्ध हालत में मौत और पिता को मां की हत्या के आरोप में जेल के बाद मासूम श्री कुमारी किसके पास रहे, उसकी देखभाल कौन करेगा इसे लेकर दोनों पक्षों के रिश्तेदार कानूनी लड़ाई में उलझ गए। बच्ची को सहारा देने के लिए हाईकोर्ट ने पहल की और मामला दोनों पक्षों के बीच आपसी सुलह के बाद निपटा। फिलहाल मध्यस्थता और कोर्ट के दखल के बाद तीन माह तक बच्ची अपने नाना के साथ रहेगी। श्रीकुमारी के नाना बृजेश कुमार सिंह ने इस मामले को लेकर हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल की थी। याचिका पर न्यायमूर्ति जेजे मुनीर ने सुनवाई की।
याची के अधिवक्ता निर्भय कुमार भारती ने बताया कि श्रीकुमारी की मां की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। मायके वालों ने दहेज हत्या और दहेज उत्पीड़न का केस दर्ज करवाया। जिसमें उसके पिता को जेल भेज दिया गया। श्रीकुमारी अपने बाबा और दादी के पास थी। जोकि बलिया के दोकटी थाना क्षेत्र निवासी हैं। बाबा ने बच्ची को मायके वालों को देने से इंकार कर दिया। इसे लेकर याचिका दाखिल की गई। कोर्ट ने दोनों पक्षों को आपसी सुलह समझौते से बच्ची की कस्टडी का मामला तय करने का निर्देश दिया।
अदालत के हस्तक्षेप के बाद मंगलवार को दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता केंद्र में वार्ता हुई । मध्यस्थों की मौजूदगी में तय हुआ कि चार साल की श्रीकुमारी फिलहाल अपने नाना बृजेश कुमार सिंह के पास अगले तीन महीनों तक रहेगी। इस आशय की रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल की गई है। अधिवक्ता निर्भय कुमार का कहना है कि मायके वाले बच्ची को हमेशा अपने पास रखना चाहते हैं इसलिए उम्मीद है कि आगे भी उनको ही कस्टडी मिलेगी।