शुक्रवार को जिला अधिवक्ता चुनाव के मतदान के दौरान बवाल हो गया। मतपत्रों पर तीनों चुनाव अधिकारियों के हस्ताक्षर नहीं होने की बात को लेकर कुछ वकीलों ने इसका विरोध किया तो मामला बिगड़ गया। कहासुनी से शुरू हुई बात ने उग्र रूप ले लिया और हाथापाई होने लगी। इससे मतदान स्थल पर अफरातफरी मच गई। यह भी आरोप है कि कुछ लोगों ने मतपत्र लूट लिए । चुनाव अधिकारी ने बवाल को देखते हुए तत्काल मतदान स्थगित करने की घोषणा कर दी। सभी बूथों से मतपत्र और मत पेटिकांए लाकर संघ भवन में रखी गई हैं। इसे सील कर दिया गया है।
अधिवक्ता संघ के चुनाव में शुक्रवार को सुबह नौ बजे से मतदान होना था मगर यह एक घंटे बाद शुरू हो सका। एक घंटे तक सब कुछ शांति पूर्वक चलने के बाद संघ के अध्यक्ष राकेश तिवारी, कार्यवाहक मंत्री मंजेश शुक्ला और पूर्व अध्यक्ष केबी तिवारी, गिरीश तिवारी आदि ने चुनाव अधिकारी से शिकायत की कि मतपत्रों पर तीनों चुनाव अधिकारियों के हस्ताक्षर नहीं हैं, यह गलत है। चुनाव अधिकारी राम नारायण द्विवेदी, कमलेश चतुर्वेदी और अनिल शुक्ल ने उन्हें बताया कि समय के अभाव के कारण अध्यक्ष और मंत्री के मतपत्रों पर ही हस्ताक्षर हो पाया है और तीनों की सहमति से अन्य पर हस्ताक्षर नहीं किया गया है। इन्हीं मतपत्रों पर मतदान कराने का निर्णय किया गया है। अधिवक्तागण चुनाव अधिकारी के इस तर्क से सहमत नहीं हुए और मतदान को रोकने की बात कही। इसी बात को लेकर विवाद बढ़ गया और अफरातफरी मच गई। नौबत हाथापाई तक की हो गई। आरोप है कि इस बीच कुछ वकील मौके का फायदा उठाकर मतपत्र लेकर भाग गए।
बवाल की सूचना पाकर मौके पर तैनात पुलिस और आरएएफ भी सतर्क हो गई। एसएसपी शलभ माथुर भी मौके पर पहुंच गए। हालांकि पुलिस और सुरक्षा बलों को मामले में हस्तक्षेप करने की जरूरत नहीं पड़ी। बवाल और हल्लागुल्ला देखते हुए तीनों चुनाव अधिकारियों ने मतदान रोक दिया और चुनाव स्थगित करने की घोषण कर दी।
तीनों चुनाव अधिकारियों ने महानिबंधक हाईकोर्ट को लिखित रूप से बताया है कि है कि चुनाव प्रक्रिया सुचारु रूप से चल रही थी इसी बीच निवर्तमान अध्यक्ष राकेश तिवारी अपने साथ कार्यवाहक मंत्री मंजेश शुक्ला और पूर्व अध्यक्ष गिरीश तिवारी और केबी तिवारी को लेकर आए तथा दुर्व्यवहार करने लगे और चुनाव रोकने का दबाव बनाया। यह भी आरोप लगाया है कि इन लोगों ने मतपत्र लूट लिया और मतपेटिका ध्वस्त कर दी। जिससे विवश होकर चुनाव स्थगित करना पड़ा।
संघ के अध्यक्ष राकेश कुमार तिवारी का कहना है कि तीन मई को हुई आम सभा में प्रस्ताव पारित किया गया था कि मतपत्रों पर तीनों चुनाव अधिकारी हस्ताक्षर करेगें। जिसका पालन नहीं किया गया। उन्हाेंने चुनाव अधिकारी रामनारायण द्विवेदी पर आरोप लगाया है कि गैर अधिवक्ताओं और कुछ अराजक तत्वों के साथ बल पूर्वक चुनाव कराने का प्रयास कर रहे थे जिसका विरोध किया गया। विरोध करने पर मारा पीटा गया और जान से मारने की धमकी दी गई।
संघ के पूर्व अध्यक्ष कृष्ण बिहारी तिवारी और गिरीश तिवारी का कहना है कि यह बात तय हो गई थी कि मतपत्रों पर यदि तीनो चुनाव अधिकारी का हस्ताक्षर नहीं होगा वह मतपत्र अवैद्य होगा। मतदान के दौरान जब बूथों पर जाकर देखा गया तो अध्यक्ष और मंत्री सहित कई प्रत्याशियों के मतपत्रों पर केवल एक ही चुनाव अधिकारी के हस्ताक्षर थे। और चुनाव अधिकारी गलत ढंग से चुनाव कराने पर अड़े थे। जिसका विरोध किया गया। उन्होने इसकी शिकायत हाईकोर्ट के महानिबन्धक से करने की बात कही है।
इलाहाबाद। चुनाव स्थगित होने से प्रत्याशियों में निराशा फैल गई है। सभी प्रत्याशी महीनों से कामकाज छोड़ कर प्रचार में जुटे थे और चाहते थे कि चुनाव हो जाए। मतदान के दिन काफी रुपये खर्च करके मतदाताओं के लिए तैयारियां की गई थी। प्रत्याशियों ने कचहरी के आसपास बड़े-बड़े पंडाल लगवाए थे जिनमें खानेपीने से लेकर चाय-नाश्ते तक का प्रबंध था। मतदान से पहले भी बड़ीबड़ी पार्टियां दी गई थी। मतदान स्थगित होने से उनके लाखों रुपयों के साथ ही महीनों की मेहनत पर भी पानी फिर गया। प्रत्याशियों को उम्मीद है कि हाईकोर्ट के आदेश से चुनाव जल्द ही होगा और उन्हे न्याय मिलेगा।
जिला अधिवक्ता संघ के चुनाव की घोषणा के बाद से ही इसके आयोजन को लेकर विवाद शुरू हो गया था। वर्तमान कार्यकारिणी ने ही चुनाव की घोषणा पहले 21 अप्रैल को की थी और राम नारायण द्विवेदी को चुनाव अधिकारी नियुक्त किया था। 27 मार्च को मतदाता सूची का प्रकाशन हो गया था। विवाद उस समय शुरु हो गया जब संघ के मंत्री कौशलेश सिंह अपना कार्यभार अध्यक्ष और एल्डर कमेटी को देकर चले गए । कार्यकारिणी ने कौशलेश सिंह को पद मुक्त कर संयुक्त मंत्री मंजेश शुक्ला को कार्यवाहक मंत्री बना दिया। संघ की कार्यकारिणी ने एल्डर कमेटी को अवैध मानते हुए दूसरी एल्डर कमेटी घोषित कर दी ।
चुनाव अधिकारी ने चुनाव प्रक्रिया शुरू कर दी और नामांकन करा दिया । बाद में चुनाव अधिकारी और अध्यक्ष के बीच आरोप प्रत्यारोप शुरू हो गया। अध्यक्ष और कार्यवाहक मंत्री ने दो अतिरिक्त चुनाव अधिकारी नियुक्त कर दिया। तीन मई को हुए दक्षता भाषण के दिन भी विवाद हुआ और अन्त में यह सहमति बनी की तीनों चुनाव अधिकारी चुनाव कराएंगे और मतपत्रों पर सभी हस्ताक्षर करेगें। 40 हजार से अधिक मतपत्रों की संख्या को देखते हुए तीनों चुनाव अधिकारियों ने आपस में तय कर लिया कि वे केवल अध्यक्ष और मंत्री पद के मतपत्रों पर ही हस्ताक्षर कर सकेंगे। मतदान के दौरान इसी बात को लेकर विरोध हुआ जिसकी वजह से चुनाव स्थगित करना पड़ा है।