वैदिक मंत्रोच्चार के साथ कलश स्थापन, आवाहन और नवग्रह पूजा के साथ रविवार को आदि शक्ति स्वरूपा की आराधना का वासंतिक नवरात्रि आरंभ हो जाएगा। इसके लिए तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। रविवार को प्रतिपदा तिथि में सूर्योदय काल से दोपहर 12:36 बजे तक अलग-अलग चार मुहूर्त में कलश स्थापन होगा। देर रात प्रमुख देवी मंदिरों को फूलों, झालरों और पताकाओं से सजा दिया गया। भोर से मंदिरों में शक्ति स्वरूपा के दर्शन के लिए कतारें लग जाएंगी। नवरात्रि के प्रथम दिन मां शैलपुत्री की आराधना होगी। कल्याणी देवी, अलोप शंकरी देवी और महाविद्या की स्वरूप ललिता देवी के दरबारों में सुबह से ही रेला उमड़ेगा।
वासंतिक नवरात्रि के आठ दिवसीय अनुष्ठानों की तैयारियों को सनातनधर्मी परिवारों में घर-घर अंतिम रूप दे दिया गया है। यथाशक्ति मां की आराधना के लिए भक्तों ने शनिवार को दिन भर खरीददारी की। नारियल, चुनरी, कलश के अलावा वेदियों के लिए गंगा तट की मिट्टी, आम के पल्लव के भी इंतजाम किए गए। रविवार की सुबह वेदियां सजाने के बाद वैदिक मंत्रों के साथ कलश स्थापना होगी। अखंड दीप जलाकर दुर्गा देवी की आराधना आरंभ होगी। सप्तशती के पाठ के अलावा मनोवांछित फलों की प्राप्ति के लिए जप किए जाएंगे। ज्योतिषाचार्य पं. भक्तराज पांडेय के अनुसार नवरात्रि में कलियुग की मंगलकारिणी देवी दुर्गा भक्तों की पुकार सुनती हैं। व्रत, पूजा और जप कर मां की आराधना करने से आंतरिक शक्ति का संचार होता है और संकट टल जाते हैं।
-मिट्टी की वेदियां बनाकर गंगा जल से भरे घट में देवी का आवाहन करें।
-इसके बाद मां का आवाहन और यथाशक्ति पुष्प, धूप, इत्र से मां का करें शृंगार।
-नवग्रह पूजा के बाद कलश पूजा कर मां का ध्यान करें। इस दौरान कामनाओं की पूर्ति के लिए दुर्गा सप्तशती का पाठ, दुर्गा स्तोत्र का पाठ फलदायी होगा।
आवाहन मंत्र:
आवाहनम न जानामि न जानामि च विसर्जनम
पूजां चैव न जानामि क्षमस्य परमेश्वरी:
मुहूर्त:
6:02 बजे सूर्योदय बेला में मीन लग्न में
प्रात: 7:21 से 8:58 तक मेष लग्न में
प्रात: 8: 58 से 10:45 तक स्थिर वृष लग्न में
अभिजीत मुहूर्त: 11:36 से 12:24 तक मिथुन लग्न में
इलाहाबाद। कल्याणी देवी मुहल्ले में स्थित महाशक्तिपीठ मां कल्याणी माता की सुबह पांच बजे मंगला आरती होगी। इसके बाद आम भक्तों के लिए कपाट खोल दिए जाएंगे। दर्शन मध्याह्न दो बजे तक चलेगा। इसके बाद दोपहर दो बजे से कल्याणी देवी का महाभिषेक होगा। मंदिर को रंग-बिरंगे फूलों, मेवा, फलों से सविधि सजाया जाएगा। महाआरती शाम 6:15 बजे होगी। यह जानकारी मंदिर समिति के अध्यक्ष सुशील कुमार पाठक ने दी। इसी तरह ललिता देवी और अलोप शंकरी देवी की सुबह पांच बजे मंगला आरती होगी और आम भक्तों के लिए फूलों से सुसज्जित दरबार दर्शन के लिए खोल दिए जाएंगे।
प्रथम शैल पुत्री
---------------
वासंतिक नवरात्र में नौ दुर्गा के साथ नौ गौरी के स्वरूपों की आराधना होगी। प्रथम दिन मां शैल पुत्री की आराधना होगी। शैलपुत्री सौम्य स्वरूपा हैं। इनको हिमवान की पुत्री के रूप में पूजा जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार वासंतिक नवरात्रि के प्रथम दिन इनके दर्शन और पूजा से शत्रु पराजय और संकटों का शमन होता है।