कामनवेल्थ-2018 की तैयारियों के दौरान मयंक के साथ बड़ा हादसा हो गया। वह 15 फीट की ऊंचाई से सीधे गर्दन के बल जमीन पर आ गिरे। उनकी रीढ़ की हड्डी में चोट लग गई। गर्दन के नीचे का पूरा हिस्सा लकवाग्रस्त हो गया। दिल्ली में 13 महीने अस्पताल में पड़े रहे। दर्जन भर ऑपरेशन हुए फिर वह व्हीलचेयर पर आ गए।
इस हादसे के बीच मयंक ने अपना सबकुछ खो दिया, लेकिन नहीं खोया तो अपना सपना। उन्होंने देश के लिए मेडल जीतने का सपना देखा था सो फैसला किया कि वह पैरा खेल में हाथ आजमाएंगे।
व्हीलचेयर और एक सहयोगी के बिना कुछ भी कर पाने में अक्षम मयंक अपने हाथ से रैकेट भी नहीं पकड़ पाते हैं। सहयोगी उनके हाथ में टेबल टेनिस की रैकेट को टेप के सहारे बांध देते हैं। फिर इसी से वह अपने सामने के खिलाड़ी को चित करते नजर आते हैं।
अबतक की उपलब्धियां
मयंक श्रीवास्तव ने 1994 से 2010 के बीच जिम्नास्टिक की तीन विश्व चैंपियनिशप, तीन कॉमनवेल्थ गेम्स, दो एशियन चैंपियनिशप, दो विश्वकप समेत दर्जन भर से अधिक अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व किया। इसके बाद पैरा गेम्स में वह टेबल टेनिस की अपनी पहली ही स्पर्धा में इंदौर में खेले गए राष्ट्रीय चैंपियनशिप में चौथा स्थान हासिल किया। वहीं, इसी वर्ष इजिप्ट में हुई ओपेन चैंपियनशिप और नई दिल्ली में हुई इंडिया रैंकिंग टूर्नामेंट में कांस्य पदक जीता है।
परिवार से मिला खास सहयोग
मयंक के परिवार में उनकी पत्नी ऋचा श्रीवास्तव और दो बेटे शौर्य और श्रेयस मौजूद हैं। दोनों बेटे भी टेबल टेनिस खेलते हैं। इन सभी की प्रेरणा से मयंक को खेलने की ताकत मिलती है। इसी कारण मयंक अपने पूरे परिवार के साथ ही प्रतियोगिता में शामिल होने जाते हैं। कोच एबादुर्रहमान से प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले मयंक फिलहाल जनवरी-फरवरी में हैदराबाद में प्रस्तावित नेशनल गेम्स की तैयारियों में जुट गए हैं।