घटना के 34 साल बाद 23 जनवरी 2020 को एसआईटी गठित कर फिर से जांच कराई गई। उसमें मृतक के पुत्र वजीर सिंह की पत्नी जोगिंदर कौर के मजीद बयान के आधार पर याची को आरोपी बना दिया। जबकि, इसके पहले जोगिंदर कौर ने जांच आयोग को दिए गए अपने हलफनामे और फिर एसआईटी की जांच में सीआरपीसी के तहत 161 के तहत लिए गए दो बार के बयान में नाम तक नहीं लिया।
उसके बाद मजिस्ट्रेट के समक्ष दिए गए 164 के बयान में भी आरोपी का नाम सामने नहीं आया। जांच अधिकारी ने 164 का बयान होने के बाद मजीद बयान लेकर याची को आरोपी बना दिया, जो कि गलत है। कोर्ट ने याची के तर्कों और परिस्थितियों को देखते हुए याची को जमानत पर छोड़ने का आदेश पारित कर दिया।