इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सांकेतिक आय के आधार पर दुर्घटना मुआवजे के भुगतान को मनमाना, अतार्किक, समानता तथा जीवन के मूल अधिकार के विपरीत करार दिया है। सामान्य समादेश जारी कर दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति की वास्तविक आय तथा भविष्य की संभावनाओं और 29 सितंबर 2021 की मल्टीप्लायर नीति के तहत निर्धारित करने को कहा है। कोर्ट ने कहा, जहां वास्तविक आय का निर्धारण करना संभव न हो, वहीं सांकेतिक आय के आधार पर मुआवजा तय किया जा सकता है।
कोर्ट ने कहा, दुर्घटना मुआवजा हमेशा उचित, तार्किक, स्पष्ट, साम्य न्याय तथा सद्भावना पर आधारित होना चाहिए। नाबालिग आश्रितों के मामले में दावे से अधिक मुआवजा तय किया जाय। इसी के साथ कोर्ट ने बिजली विभाग के अधिकारियों की लापरवाही से हाईटेंशन तार की ऊंचाई कम होने की वजह से ठेकेदार की करंट लगने से हुई मौत के मामले में उसकी वार्षिक आय 3 लाख 50 हजार पर स्कीम के तहत 66 लाख 85 हजार रुपये के मुआवजे के भुगतान का निर्देश दिया है।