इलाहाबाद (ब्यूरो)। भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान में छात्र-छात्राओं की सरकार के लिए मंगलवार को नींव पड़ गई। स्टूडेंट जिमखाना के लिए निदेशक की पहल पर शिक्षकों और छात्र-छात्राओं की पहली बैठक हुई। इसमें छात्रों ने कोर कमेटी भी गठित कर ली है। समिति एक सप्ताह में स्टूडेंट जिमखाना तथा उसके सीनेट और इसके तहत आयोजित होने वाले कार्यक्रम का प्रारूप बना लेगी। खास यह कि यह संस्थान की वैधानिक संस्था होगी और इसके पास अधिकार भी होंगे।
संस्थान में सोमवार को हुई बैठक में कार्यवाहक निदेशक प्रोफेसर जीसी नंदी ने ‘स्टूडेंट जिमखाना’ के गठन की घोषणा की थी। इसे ‘छात्र संसद’ के नाम से भी जाना जाएगा। संस्थान में छात्र-छात्राओं से जुड़ी गतिविधियों का निर्धारण विद्यार्थियों की यह संस्था ही करेगी। पदाधिकारियों का चयन छात्र-छात्राएं ही करेंगे। इसके लिए वोटिंग होगी। प्रत्येक साल जनवरी में चयन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। आईआईटीज समेत अधिकतर तकनीकी संस्थानों में इस तरह की संस्था है। उसी तर्ज पर यहां भी इसके लिए पहल की गई है। ‘स्टूडेंट जिमखाना’ में सभी वर्ग के छात्र-छात्राओं का प्रतिनिधित्व होगा। इसमें छात्राओं की भी कम से कम 33 फीसदी भागीदारी होगी। निदेशक इसके संरक्षक होंगे। इसके संचालन के लिए शिक्षकों की भी तीन सदस्यीय समिति होगी। इसके आगे के प्रारूप पर चर्चा के लिए मंगलवार हुई बैठक में कोर कमेटी घोषित की गई। जिमखाना का कौन सदस्य होगा, सीनेट में कितने पदाधिकारी होंगे, उनका नाम क्या होगा, वह कैसे काम करेगा, क्या अधिकार होंगे आदि का प्रारूप कोर कमेटी तैयार करेगी। इसके बाद छात्र-छात्राओं के द्वारा ही इनका चुनाव होगा। निदेशक प्रोफेसर जीसी नंदी का कहना है कि छात्र-छात्राएं आगे चलकर अलग-अलग क्षेत्रों में नेतृत्व करेंगे। इसलिए इनमें लोकतांत्रिक व्यवस्था की समझ तथा नेतृत्व क्षमता विकसित करने के उद्देश्य से यह पहल की गई है। एक सप्ताह में स्टूडेंट जिमखाना का खाका तैयार हो जाएगा।
स्टूडेंट जिमखाना के साथ संस्थान ने दो आयोजनों की भी घोषणा की है। अब हर साल वार्षिक खेल महोत्सव ‘अस्मिता’ का आयोजन होगा। इस साल यह फरवरी के अंतिम सप्ताह में आयोजित होगा। कौन-कौन से खेल होंगे, कौन भाग ले सकेगा इसका खाका स्टूडेंट जिमखाना को तैयार करेंगे। इसके अलावा पुराछात्र सम्मेलन के आयोजन का निर्णय लिया गया है। स्टूडेंट जिमखाना के अंतर्गत इस आयोजन के लिए एक कमेटी भी बनाई जाएगी। माना जा रहा है कि इससे पुराछात्र छात्र-छात्राओं के लिए रोजगार में मददगार साबित होंगे। साथ में संस्थान के विकास में भी इनसे मदद मिलेगी।