पुण्य की कामना के आगे
परेशानियां हुईं नतमस्तक
- कुंभ पहुंचे श्रद्धालुओं ने उठाईं दिक्कतें, फिर भी कम नहीं हुआ उत्साह
- सूरत, सीतापुर व लखनऊ से आए श्रद्धालु संगम स्नान कर हुए धन्य
कुंभनगर। कुंभ के अंतिम स्नान पर्व महाशिवरात्रि पर पुण्य की डुबकी लगाने वालों की आस्था के आगे परेशानियां भी नतमस्तक हो गईं। रविवार को कई श्रद्धालु जाम में फंसे तो कई को लंबा चक्कर लगाकर संगम तट पर पहुंचना पड़ा। लेकिन इन सबके बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह तनिक भी कम नहीं हुआ। सब हर-हर गंगे, बम-बम भोला का जयघोष लगाते संगम तट की ओर पुण्य की डुबकी लगाने को बढ़ते रहे।
संगम नोज सहित अन्य घाटों पर महाशिवरात्रि के एक दिन पहले रविवार को ही स्नानार्थियों का तांता लगा रहा। परेड मैदान की ओर जाने वाली सड़क पर भीड़ इस कदर रही कि उस पर पैदल चलना तक मुश्किल था। वहीं प्रदर्शनी स्थल के सामने बेतरतीब खड़े किए वाहन परेशानी का कारण बने रहे। इसके बावजूद श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला जारी रहा।
सूरत से आए हरिकिशन खटोड ने कहा कि कुंभ में संगम स्नान की इच्छा पूरी हुई। बताया गया कि मेला उजड़ चुका है, लेकिन यहां तो सभी कुछ ठीक लगा। वहीं लखनऊ से बेटे विशाल संग आईं लक्ष्मी देवी ने संगम स्नान को आत्मसंतुष्टि वाला बताया। उन्होंने कहाकि स्नान के बाद उन्हें परेड मैदान की तरफ भेजा गया, उन्हें जाना प्रयागघाट था। इस परेशानी को उन्होंने स्नान पुण्य के सामने नगण्य बताया।
सीतापुर के सिधौली से आए कसमांडा शिक्षक संघ के अध्यक्ष गिरिजेश अवस्थी संगम स्नान से अभिभूत थे। बोले, पिता देव प्रकाश अवस्थी की इच्छा पूरी करने के लिए प्रयागराज आया। साथ में दोस्त रोहित शुक्ला को भी लाए थे, ताकि पिताजी को दिक्कत न हो। उन्होंने बताया कि पिछले कुंभ की अपेक्षा इस बार गंगा जल काफी साफ है। व्यवस्थाएं भी ठीक हैं।
प्रसाद-माला ले गए साथ
कुंभ मेला क्षेत्र में अन्य स्नान पर्वों की तरह सख्ती न होने के कारण संगम नोज से हनुमान मंदिर फिर परेड मैदान हो किला मार्ग, पटरी पर दुकानें सजी रहीं। इससे श्रद्धालुओं को काफी सहूलियत हुई। लोग जरूरत के सामान संग प्रसाद, माला, कलावा आदि भी अपने साथ ले गए।