भाजपा सरकार में हुआ था संशोधन, तब से चल रहा खेल
0 माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड द्वारा टीजीटी-पीजीटी के कई विषय के विज्ञापन निरस्त करने का मामला
0 1998 में प्रदेश माध्यमिक शिक्षा नियमावली संशोधन का निर्णय कल्याण सिंह के नेतृत्व में हुआ था
0 पद खत्म होने के बावजूद 2001-02 से शुरू हुई टीजीटी जीव विज्ञान और प्रवक्ता वनस्पति विज्ञान के पदों पर भर्ती
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। 1998 में जब उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा नियमावली में संशोधन हुआ, तब प्रदेश में भाजपा सरकार थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के नेतृत्व में बदलाव का निर्णय लिया गया। इसके बाद प्रदेश सरकार ने जीव विज्ञान जैसे प्रमुख विषय को हाईस्कूल स्तर पर खत्म करके उसे विज्ञान में मिला दिया। इसके बावजूद उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड जीव विज्ञान जैसे विषय के लिए लगातार भर्ती करता रहा। इस प्रकार देखा जाए तो प्रदेश में 1996 से 2002 के बीच रही भाजपा सरकार के दौरान ही गलत पदों के सापेक्ष शिक्षक भर्ती हुई। यह सिलसिला लगातार प्रदेश में बनी सपा एवं बसपा की सरकारों में भी जारी रहा।
विषय खत्म होने के बावजूद चयन बोर्ड की ओर से उन पदों पर होती रही शिक्षक भर्ती में स्कूल प्रबंधकों, जिला विद्यालय निरीक्षकों और चयन बोर्ड के कर्मचारियों ने मिलीभगत कर खूब खेल किया। संशोधन के पूर्व और बाद में इंटरमीडिएट स्तर पर प्रवक्ता वनस्पति विज्ञान का कोई पद नहीं था, फिर भी शिक्षकों का चयन किया जाता रहा। चयन बोर्ड से चुने जाने के बाद जिले में भेजे गए अभ्यर्थियों को जिला विद्यालय निरीक्षकों के माध्यम से तैनाती भी मिलती रही। इसी तरह हाईस्कूल स्तर पर काष्ठ शिल्प, पुस्तक कला, टंकण, संगीत, आशुलिपि टंकण, प्रवक्ता संगीत जैसे विषयों को 2016 की भर्ती में सीधे शामिल कर दिया गया। चयन बोर्ड के सचिव दिव्यकांत शुक्ल का कहना है कि गड़बड़ी कई स्तर से हुई है, इसमें स्कूल प्रबंधक, जिला विद्यालय निरीक्षक, संयुक्त शिक्षा निदेशक, चयन बोर्ड के अधिकारी कर्मचारी सभी की भूमिका की जांच होनी चाहिए।
माध्यमिक शिक्षा नियमावली में 1998 में संशोधन के बाद भी लगातार चयन बोर्ड ने 1998, 2001-02, 2004, 2009-10 में टीजीटी-पीजीटी के लिए इन विषयों के लिए विज्ञापन निकाला और शिक्षकों का चयन किया। यह शिक्षक विद्यालयों में पद सृजित न होते हुए भी पढ़ा रहे हैं। 2011 और 2013 के विज्ञापन में इन विषयों के पद विज्ञापित किए गए हैं। चयन बोर्ड के सचिव स्वीकार करते हैं कि 2001-02 के बाद पहली बार 2011 में जीव विज्ञान और वनस्पति विज्ञान विषय की भर्ती घोषित हुई है। नियमावली में संशोधन के बाद हिंदी, गणित सहित अन्य विषयों के लिए बदलाव तो यूपी बोर्ड ने लागू कर दिया, परंतु चयन बोर्ड लगातार गलत शिक्षकों के चयन पर आंखें बंद किए रहा। इस प्रकार माध्यमिक शिक्षा में विषयों को खत्म किए जाने के बाद भी शिक्षकों के चयन में कई स्तर पर गड़बड़ी हुई है।