शाही। दो माह पहले 42 लाख की लागत से बनकर तैयार हुई शाही मिर्जापुर रोड पहली बारिश ही नहीं झेल पाई। सोमवार को हुई बारिश से बहगुल नदी का जलस्तर बढ़ने से तेज बहाव में सड़क भी बह गई। पुल के पास भी कई जगह सड़क नदी में समा चुकी है। आननफानन अधिकारियों ने अलर्ट जारी करते हुए इस मार्ग पर वाहनों को आवागमन बंद करा दिया। पिछले साल भी बरसात में सड़क नदी में बहने से इस मार्ग को छह माह तक बंद रखा गया था, इसके बाद दोबारा इसका निर्माण कराया गया, लेकिन निर्माण कराते समय पीडब्ल्यूडी अफसरों ने बाढ़ में सड़क को बचाने के लिए कोई पुख्ता इंतजाम नहीं कराए। पत्थर की पिचिंग कराने के बजाय नदी से सटी सड़क के किनारे रेत के ढेर लगाकर खानापूर्ति कर दी गई, जिसका नतीजा यह रहा कि नदी का बहाव बढ़ने से रेता के साथ सड़क भी बह गई।
सड़क मार्ग नदी में समाने के बाद पीडब्ल्यूडी के एई कुमार शैलेंद्र और जेई प्रेम सिंह स्थिति का जायजा लेने दोपहर बाद शाही पहुंचे। एई ने बताया कि शाही मिर्जापुर मार्ग करीब 2 माह पहले 42 लाख रुपये की लागत से बनकर तैयार हुआ था। खतरे को भांपते हुए प्रशासन ने शाही-मिर्जापुर मार्ग पर भारी वाहनों और चार पहिया, तिपहिया वाहनों का आवागमन बंद कर दिया है।
पिछले साल अगस्त में इसी तरह मार्ग के कट जाने से करीब 6 माह तक इसे बंद रखा गया था। इसके बाद इसका दोबारा से निर्माण कराया गया था, लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही के चलते 42 लाख रुपये फिर पानी में बह गए। निर्माण कराते समय सड़क को बचाने के इंतजाम ही नहीं किए गए। पत्थर से पिचिंग कराने के बजाय रेता डालकर खानापूर्ति कर दी गई। जिसका नतीजा यह रहा कि पहली बरसात में ही रेते की साथ ही सड़क भी बह गई। अब सड़क बहने के बाद पीडब्ल्यूडी अधिकारियों ने शासन-प्रशासन को पत्र लिखकर मामले से अवगत कराया है। उधर बाढ़ खंड अधिकारियों ने नदी की धारा पुल की सीध में करने के लिए जमीन उपलब्ध को तहसील प्रशासन से कहा है। हालांकि इसको लेकर तहसील प्रशासन कई बाद किसानों से बात कर चुका है, लेकिन मुआवजा को लेकर बात नहीं बन रही।