18 हजार की नौकरी के लिए बीटेक, एमसीए कतार में
0 एसएससी में एमटीएस के दस हजार पदों के लिए 39 लाख से अधिक आवेदन
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) की ओर से केंद्र सरकार के कार्यालयों में मल्टी टास्किंग स्टॉफ (चतुर्थ श्रेणी) के लिए दावेदारी करने वालों में बड़ी संख्या में बीटेक, एमबीए, एमसीए डिग्री वाले प्रोफेशनल शामिल हैं। लाखों खर्च कर प्रोफेशनल डिग्री लेने वाले युवा अब सरकारी नौकरी के लिए पे-बैंड 5200-20200 ग्रेड-पे 1800 पर काम करने के लिए कतार में हैं। एमटीएस के पदों पर नौकरी की शुरुआत में लगभग 18 हजार वेतन मिलेगा। इससे सरकारी नौकरी का क्रेज युवाओं में साफ दिखाई दे रहा है।
आयोग की ओर से मल्टी टॉस्किंग स्टाफ के लिए लगभग 10 हजार पदों की घोषणा की गई है। इन पदों के लिए आवेदन प्रक्रिया 22 अप्रैल से शुरू होकर 29 मई को पूरी हुई। आयोग ने पहली बार एमटीएस के पदों को भरने के लिए आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लिए आरक्षण की व्यवस्था भी की है। आवेदन के लिए आयु सीमा 18 से 25 वर्ष के बीच होने के चलते हाल में ही दसवीं पास करने वाले बड़ी संख्या में छात्रों और इसी वर्ष बीटेक, एमबीए करने वाले युवाओं ने भारी संख्या में आवेदन किए हैं।
पिछले साल से पांच लाख अधिक आवेदन
एमटीएस भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू होने के साथ यूपी बोर्ड, सीबीएसई एवं देश के अन्य बोर्ड परीक्षाओं के रिजल्ट जारी हो जाने से भारी संख्या में छात्रों ने आवेदन किया है। देश भर में 39 लाख से अधिक आवेदन आए हैं, जो पिछले वर्ष से पांच लाख अधिक हैं।
उच्च शिक्षितों को नौकरी में नहीं मिलती संतुष्टि
गोविंद बल्लभ पंत सामाजिक विज्ञान संस्थान की प्लेसमेंट ऑफिसर डॉ. रेवा सिंह का कहना है कि जॉब सिक्योरिटी के चक्कर में उच्च शिक्षित प्रोफेशनल सरकारी नौकरी के नाम पर आवेदन तो कर रहे हैं, लेकिन नौकरी के मिलने के बाद उन्हें वहां संतुष्टि नहीं मिलेगी। वह नौकरी छोड़कर जा भी सकते हैं और रहते हैं तो वह मैट्रिक पास साथी कर्मचारी के साथ काम करने में हीन भावना से ग्रस्त हो जाते हैं। कहा कि ऐसा नहीं है कि बीटेक, एमसीए सहित उच्च शिक्षित प्रोफेशनल को नौकरी नहीं मिल रही है, ऐसे में युवा निराश न होते हुए अपने स्तर की नौकरी के लिए ही दावेदारी करें तो करियर में आगे उन्नति होगी। इसका एक उदाहरण यह है कि नौकरी की स्थिरता को ध्यान में रखकर बड़ी संख्या में बीटेक, एमबीए करने वाले बाद में बीटीसी पूरा करके प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षक बन गए।