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आवारा पशुओं को नगर निगम की सीमा से बाहर करने का आदेश

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मेरठ व वाराणसी के ध्यानार्थ
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आवारा पशुओं को शहर की सीमा से करें बाहर
0 हाईकोर्ट ने वाराणसी और मेरठ के नगर निगमों को दिया आदेश
0 20 जनवरी से आठ फरवरी तक अभियान चलाने का निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। हाईकोर्ट ने वाराणसी और मेरठ में आवारा पशुओं और डेयरियों को नगर की सीमा से बाहर करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने दोनों शहरों के नगर निगमों को निर्देश दिया कि वे 20 जनवरी से अभियान शुरू करें और पांच फरवरी तक शहरी सीमा से सभी आवारा पशुओं को बाहर करें। कोर्ट ने डेयरियों को भी दो माह के भीतर नगर निगम की सीमा से बाहर करने का आदेश दिया है। जिन पशुओं को शहर की सीमा में रखा जाना है, उनके गले में टैग नंबर डाला जाना आवश्यक होगा।
मो. हाजी असलाम, मदनलाल यादव और विनय कुमार चौधरी की अलग-अलग जनहित याचिकाओं पर मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर और न्यायमूर्ति सीडी सिंह की पीठ ने यह आदेश दिया। याचिकाओं में कहा गया कि आवारा पशु और श्वानों की संख्या शहर में अत्यधिक हो गई है। इनकी वजह से आम नागरिकों के रहन-सहन में समस्या हो रही है। यह स्थिति अवैध दूध डेयरियों की वजह से और भी भयावह हो गई है। इनकी वजह से यातायात की गंभीर समस्या हो रही है और दुघर्टनाएं हो रही हैं।
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सुप्रीमकोर्ट ने मिल्कमैन कालोनी विकास समिति बनाम राजस्थान राज्य के केस में कहा है कि आवारा पशुओं और श्वानों को शहर की सीमा से बाहर किया जाना चाहिए। डेयरियां भी उचित स्थान पर शिफ्ट की जानी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि जिला प्रशासन को इस संबंध में कई बार निर्देश जारी किए गए हैं, मगर उनका कोई प्रभाव नहीं हुआ है। जबकि इस संबंध में कानून मौजूद है। कोर्ट ने दोनों जिलों के नगर निगमों को 20 जनवरी से अभियान चला कर आवारा पशुओं और श्वानों को पकड़ने तथा पांच फरवरी तक इनको शहर की सीमा से बाहर करने का निर्देश दिया है। यदि कोई व्यक्ति इन पशुओं पर दावा करता है तो उससे जुर्माना वसूलने और हलफनामा लेने के बाद छोड़ा जाए कि वह अपने पशु नगर निगम की सीमा से बाहर रखेगा। कोर्ट ने कहा है कि जिस स्थान पर इन पशुओं को रखा जाए वहां इनके आहार की व्यवस्था होनी चाहिए। शहर में घूमने वाले आवारा श्वानों को भी पुनर्वास केंद्रों मेें भेजा जाए।
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कोर्ट ने अवैध डेयरियों को चिह्नित कर उनकी सूची जिलाधिकारियों को सौंपने का निर्देश दिया है। जिलाधिकारी इनको दो माह के भीतर शहर से बाहर शिफ्ट करना सुनिश्चित करेंगे। नगर निगम को ऐसे पशुओं को पंजीकृत करने के लिए कहा है, जिनको नगर की सीमा में रखना है। इनके गले में एक टैग डाला जाएगा, जिसमें उसके मालिक का नाम और पता अंकित होगा। इस आदेश की अनुपालन रिपोर्ट दोनों जिलों के नगर निगमों को आठ मार्च 2019 तक कोर्ट में दाखिल करनी है।
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