समिति के सदस्यों के निर्देश पर चाइल्ड लाइन के माध्यम से पूरे मामले को बाल कल्याण समिति के सामने रखा गया। इस दौरान स्थानीय पुलिस भी मौजूद रही। नवजात को बृहस्पतिवार को ही राजकीय शिशु गृह में रखने का आदेश दिया गया। अन्य प्रक्रिया पूरी कर नाबालिग मां को भी शुक्रवार को बालिका गृह में लाया गया।
बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष डॉ. अखिलेश मिश्र की ओर से राज्य बाल संरक्षण आयोग को पत्र लिखा गया है। साथ ही उन्होंने पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज करने के लिए स्थानीय पुलिस को आदेश दिया है। अध्यक्ष का कहना है कि बालिका और शिशु दोनों स्वस्थ हैं।
18 वर्ष से कम आयु के बच्चों के साथ आपराधिक घटना की जानकारी बाल कल्याण समिति को भी देनी होती है लेकिन 14 वर्ष की उम्र में मां बनने वाली बच्ची के मामले में ऐसा नहीं किया गया। थाने में जनवरी में ही घटना की शिकायत हुई थी लेकिन पुलिस ने समिति को सूचना नहीं दी। इस पर अध्यक्ष ने पुलिस कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई।
सशक्तिकरण के नारों के बीच महिला उत्पीड़न की घटनाओं को लेकर नेता तथा प्रशासन कितना संजीदा है, इसका अनुमान इससे ही लगाया जा सकता है कि अधेड़ की दरिंदगी का शिकार होकर 13 वर्ष की उम्र में मां बनने वाली बिटिया को महीनों बाद भी तीन लाख रुपये नहीं मिले। सांसद डॉ. रीता बहुगुणा जोशी के हस्तक्षेप तथा घोषणा के बावजूद बिटिया को देने के लिए प्रशासन छह महीने बाद भी तीन लाख रुपये का इंतजाम नहीं कर सका।
चार महीने के बच्चे को लेकर बच्ची 27 अक्तूबर को डीएम के यहां फरियाद के लिए पहुंची थी। इसके बाद सांसद डॉ.रीता बहुगुणा जोशी ने भी बिटिया से मुलाकात की। इसके बाद बच्ची को खेती तथा रहने के लिए दो स्थानों पर अलग-अलग जमीन तो मिल गई लेकिन, तीन लाख रुपये अभी तक नहीं मिले। जबकि, नवंबर के पहले सप्ताह में ही तीन लाख रुपये दिए जाने की घोषणा की गई थी। बिटिया के पिता का कहना है कि तीन दिन पहले जिला प्रोबेशन अधिकारी से मुलाकात हुई थी। उन्होंने जल्द ही पैसा दिए जाने की बात कही।