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हाईवे से हटाई गईं शराब की 1151 दुकानें अक्तूबर से फिर खुलेंगी

Sat, 16 Sep 2017 01:46 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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प्रदेश सरकार पहली अक्तूबर से शहरी इलाकों में पुराने स्थानों पर फिर से दुकानों को शिफ्ट कराएगी। इस बारे में अगले सप्ताह शासनादेश जारी होने की संभावना है। आबकारी आयुक्त इलाहाबाद ने शासनादेश जारी करने के लिए लखनऊ ब्योरा भेज दिया है। जिस पर शासन में विधिक राय ली जा रही है। इस आदेश से प्रदेश के 1151 शराब दुकानदारों को राहत मिल सकेगी।
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प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर कर शहरी इलाकों में हाईवे से 500 मीटर तक शराब की दुकानों को फिर से संचालित करने का अनुरोध किया था। इसके लिए यह तर्क दिया था कि शहरी इलाके में दुकान खोलने के लिए स्थान नहीं मिल रहा है। जिसके कारण प्रदेश सरकार को 25 अरब से अधिक के राजस्व की क्षति हो रही है। ग्रामीण इलाकों में हाईवे से 500 मीटर दूर शराब की दुकान खोलने के आदेश का पूरी तरह से पालन हो चुका है। प्रदेश सरकार के इस अनुरोध को स्वीकार कर सुप्रीम कोर्ट ने शहरी क्षेत्र में 500 मीटर दूर शराब की दुकान खोलने की बाध्यता खत्म कर दी है। लेकिन ग्रामीण इलाकों में यह आदेश यथावत रहेगा।

प्रदेश के प्रमुख सचिव एवं आयुक्त आबकारी धीरज साहूू ने सुप्रीम से राहत मिलने के बाद नए सिरे से शासनादेश का ड्राफ्ट इलाहाबाद स्थित आयुक्त कार्यालय से मंगा लिया है। जिसके आधार पर अगले सप्ताह शासनादेश जारी होने वाला है। शासनादेश में सितंबर के अंत और अक्तूबर के पहले सप्ताह में दुकानों का आवंटन और शिफ्ट करने की प्रक्रिया पूरी करने की तैयारी है। इस व्यवस्था से प्रदेश सरकार को करीब 12 अरब रुपये का अतिरिक्त राजस्व मिल सकेगा।
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प्रदेश सरकार अगले साल अप्रैल से र्नई आबकारी नीति में शराब पीने वालों को मनमाफिक ब्रांड उपलब्ध कराएगी। इस बारे में सरकार की ओर से सभी थोक लाइसेंसी को लिखित में अनुबंध करना होगा। अभी तक थोक लाइसेंसी अधिक मुनाफे वाले ब्रांडों की अंग्रेजी शराब ही फुटकर लाइसेंसी को उपलब्ध करा रहे हैं। जिसे लोग मजबूरी में खरीद रहे हैं।

दो महीने पहले प्रदेश सरकार ने शराब सिंडिकेट पर अंकुश लगाने के लिए नई आबकारी नीति लागू करने का फैसला लिया था। जिसके लिए इलाहाबाद से उपायुक्त और अपर आयुक्त स्तर के अफसरों की चार टीम बनाई गईं थीं। इन टीमों ने 24 राज्यों का दौरा कर वहां की आबकारी नीति का अध्ययन किया । यह इसी माह रिपोर्ट सौंप दी है। जिसमें कहा गया है कि थोक लाइसेंसी की शराब के ब्रांड को लेकर मनमानी रुकनी चाहिए। जिसके लिए नियमावली तैयार की जा रही है। जिसमें मुख्य फोकस खास ब्रांड की शराब बेचने का कॉकस तोड़ना है। जिससे कि लोगों को मनचाही ब्रांड की शराब आसानी से उपलब्ध हो सके।
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