सात सूत्री मांगों को पूरा कराने के लिए 108 और 102 एंबुलेंस चालक सोमवार को हड़ताल पर रहे। रविवार रात 12 बजे से सेवाएं बाधित की गईं। एंबुलेंस चालकों की प्रदेशव्यापी हड़ताल से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। इमरजेंसी सेवाओं के लिए हड़ताल से मुक्त दस एंबुलेंस से जरूरतमंदों को राहत नहीं मिली। परेड मैदान पर 80 एंबुलेंस खड़ी कर चालकों समेत अन्य कर्मचारियों ने एकजुटता का परिचय दिया। सीएमओ और प्रशासनिक अधिकारियों को स्थिति की जानकारी थी, लेकिन किसी ने बातचीत की पहल नहीं की।
जिले में कुल 96 एंबुलेंस हैं। इनमें मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के लिए 108 सेवा के तहत 42, महिलाओं और बच्चों के लिए 102 सेवा की 51 तथा तीन एएलएस एंबुलेंस शामिल हैं। हड़ताली चालकों के मुताबिक छह एंबुलेंस खराब होने के कारण गैराज में खड़ी हैं। दस एंबुलेंस को मानवीय आधार पर गंभीर मरीजों के लिए हड़ताल से मुक्त रखा गया।
सोमवार को दिन भर एंबुलेंस हड़ताल का असर साफ दिखा। मरीज, तीमारदार भटकते रहे। कंट्रोल रूप ने भी 50 फीसदी कॉल अटेंड कीं, सेवाएं 99 फीसदी बाधित रही। एंबुलेंस चालक संघ के प्रदेश अध्यक्ष हनुमान पांडेय के आह्वान पर जिला अध्यक्ष आशीष मिश्रा ने अनिश्चित हड़ताल जारी रखने का एलान किया है।
जिलाध्यक्ष आशीष मिश्रा के मुताबिक हम एंबुलेंस सेवा को ठेका प्रथा से मुक्त कराना चाहते हैं। वेतन, भत्ते समेत सात सूत्री मांगों पर शासन, प्रशासन और कंपनी के अफसर ध्यान नहीं दे रहे हैं। कोरोना काल में एंबुलेंस चालकों समेत अन्य स्टॉफ की सेवाओं को दरकिनार कर सिर्फ शोषण किया जा रहा है। हम हक मिलने तक आंदोलन जारी रखेंगे। एंबुलेंस के पहिए नहीं हिलेंगे।
परेड मैदान पर हुई सभा में वक्ताओं ने एकजुटता का संकल्प दोहराया। इस मौके पर बंशीधर मिश्रा, विमल मिश्रा, सुखपाल, सुरेंद्र कुशवाहा, अशोक पटेल, नितेश, आनंद, रामबाबू, अंकित मौर्या, विनोद कुमार पाल समेत अन्य एंबुलेंस चालक आदि मौजूद रहे।