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सेवानिवृत्त कर्मचारी से किसी नियम के बिना वसूली करना अनुचित- हाईकोर्ट

Tue, 03 Apr 2018 04:46 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इलाहाबाद
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हाईकोर्ट ने कहा कि सेवानिवृत्त कर्मचारी से बकाया वसूली नहीं की जा सकती है। ऐसा कोई नियम नहीं है और नियम के अभाव में की गई वसूली अनुचित है। कोर्ट ने वन विभाग इलाहाबाद के अवकाश प्राप्त कर्मचारी के सेवानिवृत्ति परिलाभों से की गई कटौती को गलत मानते हुए आदेश रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कर्मचारी को रिटायर होने की तारीख से सात प्रतिशत ब्याज के साथ समस्त देयों का भुगतान छह माह के भीतर करने का निर्देश दिया है।

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याची सुरेंद्र बहादुर सिंह की याचिका पर न्यायमूर्ति सिद्धार्थ ने सुनवाई की। याची का कहना था कि वह उत्तर प्रदेश वन निगम इलाहाबाद में लॉजिंग प्रबंधक के पद पर कार्यरत था। 31 जुलाई 2015 को वह सेवानिवृत्त हुआ तो उसे बताया गया कि उस पर पुराने अग्र्रिम भुगतान का बकाया है, जिसका उसने कोई बिल-बाउचर प्रस्तुत नहीं किया है। इसलिए उसके परिलाभों से 93067.25 रुपये काटने के बाद ही भुगतान किया जाएगा।

विभाग ने उसे स्पष्ट रूप से यह नहीं बताया गया कि उस पर कितना बकाया है। उसे सुनवाई का मौका भी नहीं दिया गया। याचिका में कहा गया कि बिना किसी नियम के एकपक्षीय वसूली करना अनुचित है। सुप्रीमकोर्ट ने पंजाब राज्य बनाम रफीक मसीह के केस में कहा है कि सेवानिवृत्ति के बाद की गई वसूली कर्मचारी के परिवार को प्रभावित करती है, इसलिए यह अनुचित है। वसूली सेवाकाल के दौरान ही की जानी चाहिए। कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए वसूली आदेश रद्द कर दिया है।

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