देवरिया नारी संरक्षण गृह कांड के बाद प्रदेश सरकार ने 20 नवंबर तक प्रदेश के सभी आश्रय गृहों, नारी निकेतनों और नारी संरक्षण गृहों में सीसीटीवी कैमरे लगाने का निर्देश दिया है। इसके अलावा सभी ऐसी संस्थाओं से एक मनोचिकित्सक को भी संबद्ध कर दिया गया है जो समय-समय पर अंत:वासियों की जांच करेंगे।
हाईकोर्ट में यह जानकारी देते हुए अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने बताया कि इन निर्देशों का पालन न करने वाले आश्रय गृहों का लाइसेंस निरस्त कर दिया जाएगा। मामले की सुनवाई कर रही मुख्य न्यायमूर्ति डीबी भोसले और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की पीठ को अपर महाधिवक्ता ने बताया कि संरक्षण गृहों को लेकर सुप्रीमकोर्ट ने गाइड लाइन दी है। इस गाइड लाइन का कड़ाई से पालन करने का निर्देश दिया गया है।
देवरिया कांड के बाबत उन्होंने बताया कि 26 अंत:वासिनियों के सुरक्षित निवास की व्यवस्था कर दी गई है। कोर्ट ने अगली तारीख पर इस मामले में चल रही विवेचना की प्रगति बताने का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट ने देवरिया कांड पर स्वत: संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका कायम की है। कोर्ट की पहल पर इस घटना की शिकायत करने वाली तीन लड़कियों को सुरक्षित और अज्ञात स्थान पर रखा गया है।
नियमित निगरानी के दौरान कोर्ट ने प्रदेश सरकार से पूछा था कि आश्रय गृहों में सीसीटीवी कैमरे लगाने को लेकर सरकार की क्या योजना है। इस पर प्रदेश सरकार ने उठाए गए कदमों की जानकारी हाईकोर्ट को दी है।