बंगलादेश आतंकी घटना के बाद संदेह के घेरे में आए इस्लामिक धर्म उपदेशक डॉ. जाकिर नाईक को एएमयू एक्ट एवं स्टेटयूट्स का उल्लंघन कर कोर्ट सदस्य चुना गया। जाकिर नाईक के एनआरआई होने की चर्चा के बाद कैंपस में इस बात की चर्चा जोरों से हो रही है।
एएमयू कोर्ट सदस्य रहे डॉ. जाकिर को लेकर एएमयू प्रशासन द्वारा अभी तक साफ-साफ कुछ नहीं बताया गया है। यह भी अभी रहस्य बना हुआ है कि आखिर एएमयू कोर्ट सदस्य बनाने के लिए डॉ. जाकिर नाईक का प्रस्तावक एवं अनुमोदक कौन था तथा किसने उससे कोर्ट सदस्य बनने के लिए सहमति ली थी।
मीडिया में डॉ. जाकिर नाईक के एनआरआई होने की खबर आने के बाद कैंपस में चर्चा है कि यदि जाकिर एनआरआई है तो वह एएमयू कोर्ट सदस्य कैसे बन गया। एएमयू एक्ट के स्टूटयूट्स 41 के अनुसार एनआरआई एएमयू के किसी संस्था का सदस्य या अधिकारी नहीं बन सकता है। 2010 में ऐसा ही एक मामला उच्च न्यायालय में भी गया था। ऐसे में अगर जांच हुई तो डॉ. जाकिर का एएमयू कोर्ट सदस्य मामले में कुछ बड़ा खुलासा हो सकता है।
उल्लेखनीय है कि 12 जून 2013 को इस्लामिक धर्म प्रचारक डॉ. जाकिर नाईक मुस्लिम कल्चर एंड लर्निंग कैटेगरी से एएमयू कोर्ट सदस्य चुने गए थे। इस वर्ष 11 जून को उनका तीन वर्ष का कार्यकाल समाप्त हुआ।
डॉ. जाकिर नाईक के प्रस्ताव, अनुमोदक एवं सहमति लेने वाले व्यक्ति के नामों का खुलासा अभी तक विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा नहीं किया गया है। इस संबंध में पूछे जाने पर एएमयू जनसंपर्क विभाग के एमआईसी डॉ. राहत अबरार ने बताया कि हमें नहीं मालूम कि डॉ. जाकिर नाईक एनआरआई है या नहीं। विदेश मंत्रालय या गृह मंत्रालय को स्पष्ट करना चाहिए कि डॉ. जाकिर नाईक एनआरआई है या नहीं।