पहले सवर्णों की पार्टी की छवि वाली भाजपा बड़ी तेजी से अनुसूचित जाति के वोटरों को अपने पाले में करने की कवायद करती नजर आ रही है। कई भाजपा नेताओं का दावा है कि पिछले कुछ चुनावों में बड़ी संख्या में अनुसूचित जाति के वोटरों ने भाजपा का साथ दिया था। लिहाजा इस बार भी उन्हें अपने पाले से खिसकने नहीं देना है। हाथरस लोकसभा तो अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। यहां अनुसूचित जाति के वोटरों की संख्या लगभग पौने तीन लाख है।
मौजूदा समय भाजपा के ही सांसद राजवीर सिंह दिलेर हाथरस का प्रतिनिधित्व करते हैं। भाजपा इस सीट को किसी भी सूरत में हाथ से जाने नहीं देना चाहेगी। हाथरस में ब्राह्मण वोटर भी बड़ी संख्या में हैं। इनकी संख्या दो लाख पंद्रह हजार के लगभग है। भाजपाई इसे अपना पारंपरिक वोट मानते हैं। भाजपा की असली चिंता अनुसूचित जाति के वोटरों की है। बसपा ने अगर मुस्लिम और कुछ अन्य जातियों में सेंध लगा दी तो यह पार्टी अपने परंपरागत वोटरों के साथ भाजपा के समक्ष बड़ी चुनौती के तौर पर सामने आ सकती है।
अलीगढ़ लोकसभा सीट में तो अनुसूचित जाति के लगभग 21 फीसदी वोटर हैं। ये वोटर किसी भी पार्टी के पक्ष में चुनावी पलड़ा झुका सकते हैं। काछी, धोबी, कुम्हार वोटरों की संख्या ही दो लाख से ज्यादा है। मुस्लिम वोटरों की संख्या लगभग साढ़े चार लाख है। धार्मिक तौर पर मुस्लिम वोटर सबसे ज्यादा हैं। अलीगढ़ लोकसभा सीट पर ब्राह्मण ढाई लाख, जाट ढाई लाख, वैश्य दो लाख, नाई तीन लाख. यादव 1.60 लाख, लोध राजपूत 1.70 लाख हैं। भाजपा को मुस्लिम वोटरों से उतनी अपेक्षा नहीं है। लेकिन मुस्लिम और अनुसूचित जाति का गठजोड़ भाजपा की परेशानियां बढ़ा सकता है। लिहाजा भाजपा अभी से अनुसूचित जाति के वोटरों को साधने में जुट गई है।
मुख्यमंत्री योगी के साथ हाथरस और अलीगढ़ में दो मंत्री बेबी रानी मौर्य और गुलाब देवी शिरकत करेंगी। दोनों ही अनुसूचित जाति से ताल्लुक रखती हैं और आसपास के ही इलाके की हैं। गुलाब देवी संभल और बेबी रानी मौर्य आगरा की हैं। भाजपा के रणनीतिकारों का मानना है कि दोनों मंत्रियों का असर अपनी जाति के वोटरों पर जरूर पड़ेगा। लेकिन भाजपा को सबसे ज्यादा उम्मीद अपने तेजतर्रार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से ही है जिनकी लोकप्रियता हर धर्म और जाति में है, इससे तो उनके धुर विरोधी भी इंकार नहीं कर सकते।