पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी के सिर पर 11 लाख का इनाम घोषित करने वाले भाजयुमो नेता योगेश वार्ष्णेय ने खुद पर दर्ज मुकदमे में सरेंडर होने की तैयारी कर ली है।
इस सिलसिले में सोमवार को योगेश ने अधिवक्ता के माध्यम से सीजेएम न्यायालय में सरेंडर याचिका दायर की है, जिस पर अदालत ने सुनवाई के लिए बुधवार की तारीख नियत की है।
खास बात है कि इस याचिका में योगेश ने अधिवक्ता के माध्यम से सीधे-सीधे लिखा है कि उस पर झूठा मुकदमा दर्ज कराया गया है, जिसकी खबर उसे समाचार पत्रों के माध्यम से लगी है।
अधिवक्ता सरदार मुकेश सैनी के माध्यम से योगेश वार्ष्णेय की ओर से दायर की गई सरेंडर याचिका में कहा गया है कि वह भाजयुमो का कार्यकर्ता है और जम्हूरियत के सुकून के लिए जुल्मो सितम से टक्कर लेता रहता है।
इसलिए दुश्मन उसे बड़ा खतरा मानते हैं। उसे समाचार पत्रों से पता चला कि उसके खिलाफ रामफूल उपाध्याय नाम के किसी नेता ने मुकदमा दर्ज कराया है, जो कि झूठा है।
उसने अदालत से अनुरोध किया है कि इस मुकदमे में उसे अभिरक्षा में लिया जाए। इस पर अदालत ने बुधवार (19 अप्रैल) की तारीख नियत की है। पुलिस से मुकदमे के संबंध में आख्या तलब की है।
कोलकाता जाने से बचने की प्लानिंग तो नहीं
कानून के जानकार मानते हैं कि योगेश पर जो मुकदमा सिविल लाइंस थाने में दर्ज हुआ है, वह धारा 506 के तहत जमानतीय है। जिसमें सरेंडर याचिका दायर करने की आवश्यकता नहीं थी। मगर योगेश पर कोलकाता पुलिस ने अपने यहां भी कोई मुकदमा दर्ज किया होगा।
अगर वहां मुकदमा दर्ज हुआ होगा तो निश्चित तौर पर उसमें गिरफ्तारी, जमानत या जेल जाने की औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी। चूंकि एक ही अपराध के दो मुकदमे दर्ज होने का प्रावधान नहीं है। अगर अंजाने में दो मुकदमे दर्ज हो जाएं तो उन्हें एक ही में मर्ज करने का भी प्रावधान है।
योगेश ने कोलकाता जाने से बचने के लिए कानूनी प्रक्रिया यहां पहले से शुरू करके कोलकाता जाने से बचने की प्लानिंग बनाई है।