अलीगढ़ के कासिमपुर पावर हाउस में वर्ष 2011 में हुए बहुचर्चित भाजपा नेता यशपाल सिंह चौहान व उनके भाई अनिल चौहान की हत्या का मुकदमा निर्णय की दहलीज पर पहुंच गया है। एडीजे-16 मोहम्मद नसीम की अदालत में विचाराधीन मुकदमे में सभी गवाही पूरी और आरोपियों के बयान होने के बाद बहस की तारीख नियत कर दी गई है। हालांकि, मुकदमे में शुक्रवार को बहस की तारीख नियत थी। मगर अब अगली तारीख 8 अप्रैल नियत कर दी गई है। बता दें कि स्क्रैप के करोड़ों के ठेके में वर्चस्व की रंजिश को लेकर दिनदहाड़े इस दोहरे हत्याकांड को अंजाम दिया गया था, जिसके बाद कई दिनों तक जिले की सियासत में खलबली मची रही थी।
ये है फ्लैशबैक
घटना 3 मार्च 2011 की दोपहर करीब एक बजे की है। मूल रूप से बड़ागांव उखलाना हाल पीएसी निवासी बरौली से विधायकी लड़ चुके वरिष्ठ भाजपा नेता यशपाल सिंह चौहान, उनके भाई अनिल, चालक शिवकुमार, परिवार के प्रदीप, भतीजा संकेत, पुष्पेंद्र व दूसरे भाई सतीश चौहान कासिमपुर पीएनबी शाखा में रुपये निकालने गए थे, जैसे ही ये लोग बैंक से निकले, तभी बाहर पहले से घात लगाए बैठे हमलावरों ने ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। इस घटना के चलते करीब आधा घंटे तक मौके पर अफरा-तफरी का माहौल रहा। लोगों ने अपनी दुकानें तक बंद कर दीं और घरों व दीवारों की आड़ में छिपकर खुद को बचाया। इस हमले में अनिल चौहान की मौके पर मौत हुई, जबकि यशपाल सिंह चौहान, संकेत व पुष्पेंद्र जख्मी हुए, जिन्हें मेडिकल कॉलेज पहुंचाया गया, जहां कुछ देर के उपचार के बाद यशपाल सिंह चौहान की भी मौत हो गई थी।
मुकदमे में यह रही पुलिस कार्रवाई
जवां थाने में इस घटना का मुकदमा यशपाल सिंह के भाई सतीश सिंह की ओर से अशोक रावत, प्रमोद राघव, केशव, कन्हैया आदि पर दर्ज कराया गया, जिसमें आरोप था कि कासिमपुर पावर हाउस में ठेकेदारी से जुड़ी रंजिश को लेकर यह हत्याएं की गई हैं। विवेचना के दौरान पुलिस ने पाया कि पावर हाउस में यशपाल सिंह चौहान की गहरी पकड़ व रसूख थी। इसी रसूख के दम पर कई करोड़ रुपये के स्क्रैप के ठेके में वर्चस्व को लेकर यह घटना हुई। पुलिस विवेचना में मूल रूप से परौरी जहांगीरपुर नोएडा हाल कासिमपुर निवासी अशोक रावत, अवनीश, बनैल पहासू बुलंदशहर हाल कासिमपुर के प्रमोद राघव, अजयपाल उर्फ नेकसे, दिनेश, सतेंद्र सभी निवासी बनैल पहासू, मूल रूप से जेवर हाल कासिमपुर के कन्हैया, बनैल पहासू के कमल सिंह, कासिमपुर के केशव को गिरफ्तार कर सभी पर चार्जशीट दायर की। इस मुकदमे में 20 गवाह बनाए गए।
रायफल लूट का था आरोप, बाद में मिली
घटनास्थल पर हमलावरों की संख्या अधिक और एकाएक हमला होने के कारण यशपाल पक्ष खुद को सही से बचा नहीं पाया था। इस दौरान हमलावरों पर बचाव पक्ष की रायफल तक लूट ले जाने का आरोप लगा था। हालांकि बाद में पुलिस ने यह रायफल बरामद कर ली थी।
भाजपा ने किया था कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन
जिस वक्त ये घटना हुई थी, उस वक्त प्रदेश में बसपा सरकार थी। घटना के अगले दिन भाजपा के तत्कालीन प्रदेशाध्यक्ष सूर्यप्रताप शाही जिले के दौरे पर आए और वे घटनास्थल पर गए। इसके अलावा यशपाल सिंह चौहान के घर पहुंचकर उनके अंतिम संस्कार में भी शामिल हुए। इसके बाद जब कई दिन तक घटना में गिरफ्तारी नहीं हुई तो कानून व्यवस्था को मुद्दा बनाकर प्रदेश भर में प्रदर्शन हुए थे। यहां जिला मुख्यालय पर आयोजित प्रदर्शन में भाजपा के वरिष्ठ नेता कलराज मिश्र की अगुवाई में प्रदर्शन हुआ था। कुल मिलाकर कई दिन तक जिले की सियासत में इस कांड के बाद खलबली मची रही थी।
पुलिस को झेलनी पड़ी थी ‘सरेंडर’ की फजीहत
इस घटना के वक्त सीओ तृतीय सर्किल के पद पर तैनात अधिकारी पर मुख्य आरोपियों को सियासी दखल के चलते ‘सरेंडर’ कराने तक के आरोप लगे थे। यहां तक आरोप लगे थे कि एक राजनीतिक व्यक्ति की मध्यस्थता से ये ‘सरेंडर’ कराए गए। जिसे लेकर भाजपा ने पुलिस को घेरा था। पुलिस फजीहत के चलते बाद में तत्कालीन एसएसपी सत्येंद्रवीर सिंह के स्तर से अधिकारी के खिलाफ कार्यक्षेत्र बदलने की कार्रवाई की गई थी।
अब मुकदमे में जल्द निर्णय आने की उम्मीद
यह मुकदमा एडीजे-16 की अदालत में विचाराधीन है। मुकदमे में सभी गवाही पूरी हो गई हैं। साथ में 313 के तहत आरोपियों के बयान दर्ज हो गए हैं। शुक्रवार को बहस की तारीख नियत थी। मगर अदालत के अवकाश पर होने के कारण अब 8 अप्रैल तारीख नियत कर दी गई है। अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता एडीजीसी गोपाल सिंह राणा के अनुसार उम्मीद है कि अगली तारीख पर बहस पूरी होने के बाद जल्द निर्णय सुनाया जा सकेगा। अभियोजन की ओर से मजबूत पैरवी की गई है।