फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अलीगढ़ : प्रचार अभियान शुरू होते ही गायब हुए श्रमिक

विज्ञापन
विज्ञापन
विधानसभा चुनाव 2022 के लिए 28 जनवरी से शुरू हुए प्रचार अभियान के बाद से जिले के श्रमिक गायब हो गए हैं। अब क्वार्सी चौराहे, तिराहे समेत शहर की प्रमुख चौराहों पर सुबह के समय लगने वाला श्रमिकों का जमघट गायब है। भवन निर्माण में लगे श्रमिक भी नहीं आ रहे हैं। यहां तक कि मनरेगा श्रमिकों को भी प्रत्याशियों के प्रचार अभियान में काम मिलने से पिछले करीब दस दिन से विकास परियोजनाओं के काम की गति मंद पड़ी है। मंगलवार को प्रचार अभियान थम गया है। दो दिन बाद मतदान होना है। इसके बाद ही इन श्रमिकों के काम पर आने की उम्मीद है।
विज्ञापन

विधानसभा चुनाव 2022 के प्रथम चरण में शामिल अलीगढ़ जनपद में 14 जनवरी से 21 जनवरी तक प्रत्याशियों के नामांकन हुए। 22 जनवरी को जांच हुई तो 27 फरवरी को नाम वापसी के साथ ही प्रचार अभियान आरंभ हो गया। इस प्रचार अभियान में विभिन्न दलीय एवं निर्दलीय प्रत्याशियों ने अपने समर्थकों के साथ जिले के कोने-कोने की खाक छानी तो संख्या बल दिखाकर विरोधियों को अपनी ताकत का अहसास कराने में भी कोई कोरकसर नहीं छोड़ी। इसमें सर्वाधिक इस्तेमाल हुआ श्रमिक वर्ग का। चाहे जनसभा हो, पार्टी कार्यालय पर कुकिंग से लेकर अन्य व्यवस्थाएं या फिर जनसंपर्क, सभी में इन श्रमिकों का खूब इस्तेमाल हुआ। परिणामस्वरूप अब तक काम पाने के लिए क्वार्सी चौराहे, क्वार्सी तिराहे, सारसौल चौराहे, सासनीगेट समेत अन्य प्रमुख स्थानों पर बड़ी संख्या में सुबह के समय मिलने वाले श्रमिक गायब हो गए।
मनरेगा श्रमिकों की संख्या भी घटी
अलीगढ़। मनरेगा योजना में काम मांगने वाले वाले श्रमिकों की संख्या पर भी असर पड़ा। आंकड़ों पर नजर डालें तो जनवरी माह में 3478434 प्रस्तावित मानव दिवस के सापेक्ष 3185937 मानव दिवस सृजित हो सके। यानी कि 292497 मानव दिवस कम सृजित हो सके। बताते चलें कि दिसंबर 2021 में प्रस्तावित 3306257 मानव दिवस के सापेक्ष 3135497 मानव दिवस सृजित हुए थे। मनरेगा परियोजना से जुड़े एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पिछले एक सप्ताह से तो मनरेगा में काम मांगने वालों की संख्या मात्र 40 से 45 फीसदी ही रही।
विज्ञापन
विज्ञापन

विकास परियोजनाओं का काम चल रहा है। चुनाव के दौरान इसमें श्रमिक संख्या में कितनी कमी आई है। इस पर गौर नहीं किया है। काम पर थोड़ा बहुत असर हो सकता है।
भाल चंद त्रिपाठी, पीडी डीआरडीए, प्रभारी अधिकारी मनरेगा
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें