अमर उजाला के तालानगरी कार्यालय में हुए संवाद कार्यक्रम में महिलाओं ने लोकसभा चुनाव में अपनी बेबाक राय रखी। महंगाई से रसोई के बिगड़े बजट से परेशान महिलाओं ने चुनाव में ऐसा प्रत्याशी चुनने की बात कही है, जो इस ज्वलंत समस्या से राहत दिला सके। महिलाएं शिक्षा, रोजगार, खराब सड़कें, विकास के मुद्दे को लेकर काफी मुखर हैं।
लोकसभा चुनाव में महिलाएं अपना कीमती वोट देकर सरकार बनाने में अहम भूमिका निभाएंगी। महिलाएं चाहती हैं कि उनकी सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम हों और कानून का राज रहे। सबसे बड़ा मुद्दा महंगाई का है। 12 अप्रैल को अमर उजाला के तालानगरी कार्यालय में हुए संवाद कार्यक्रम में महिलाओं ने लोकसभा चुनाव में अपनी बेबाक राय रखी।
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महंगाई से रसोई के बिगड़े बजट से परेशान महिलाओं ने चुनाव में ऐसा प्रत्याशी चुनने की बात कही है, जो इस ज्वलंत समस्या से राहत दिला सके। महिलाएं शिक्षा, रोजगार, खराब सड़कें, विकास के मुद्दे को लेकर काफी मुखर हैं। वह अपने बच्चों के बेहतर भविष्य को लेकर भी वोट देंगी। उन्होंने कहा कि चुनाव में एक-एक मत का महत्व है। यह कतई मत सोचिए कि एक मत से क्या होगा ? इसलिए अपने मत को अपनी ताकत समझकर मतदान में हिस्सा लेना है।
आज महिलाएं पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं। महिलाओं को राजनीतिक पार्टियां टिकट नहीं देती हैं। सभी राजनीतिक दलों को चाहिए कि वह अधिक से अधिक महिलाओं को टिकट दें, ताकि उन्हें भी राजनीति में बराबरी का हक मिल सके। -नंदनी वार्ष्णेय, सामाजिक कार्यकर्ता
चुनाव में महिलाओं को आरक्षण मिलता है, लेकिन टिकट उनकी खुद की पहचान से नहीं मिलती है। उन्हें उनके पति, जेठ, देवर आदि के नाम पर टिकट दी जाती हैं। महंगाई बड़ा मुद्दा है। जब भी बाजार जाते हैं तो पता चलता है कि महंगाई और बढ़ गई है। सड़कों की हालत बेहद दयनीय है। महिलाएं अपने पसंद के उम्मीदवार का चयन नहीं कर पाती हैं। वह घर के पुरुषों के कहने पर वोट करती हैं। राजनीति में स्वच्छता लाने के लिए अपराधियों को मौका नहीं देना चाहिए। - डॉ. इंदु सिंह, हेड डिर्पाटमेंट ऑफ मैनेजमेंट आईआईएमटी कॉलेज।
ऐसे सांसद का चयन करना चाहिए जो जनता से जुड़ीं समस्याओं के समाधान के लिए संसद में उनकी आवाज को बुलंद करें। केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ सभी को मिले इसके लिए शिक्षित लोगों को आगे आना चाहिए।-शोभा अग्रवाल, शिक्षिका डीपीएस स्कूल।
सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन कराने के लिए सांसद का उच्च शिक्षित होना चाहिए। सांसद को कम से कम दो महीने में नगर निगम के अफसरों व डीएम के साथ समन्वय बैठक करनी चाहिए,जिससे समस्याओं का समाधान हो सके। सभी स्कूल, कॉलेजों में एनसीआरटी की किताबें लागू हो। - सुधा सारस्वत, वाइस चेयरपर्सन विवेकानंद ग्रुप ऑफ कॉलेज
सांसद जनता से जुड़ी मांगों व समस्याओं का प्रभावी समाधान कराए। संसद में जनहित से जुड़े मुद्दों को उठाए। महिलाओं को राजनीति में आगे आना चाहिए, ताकि उनकी दिक्कतों का समाधान हो सके। -नीतू गुप्ता, सामाजिक कार्यकर्ता
बेटी के बड़े हो जाने पर शादी कर उसे ससुराल भेज दिया जाता है। जहां उसे लक्ष्मी बता दिया जाता है। यह उसे सम्मान नहीं दिया गया है बल्कि उसे घरेलू जिम्मेदारियों के बीच उलझा दिया गया है। वह जिम्मेदारियों में इस कदर उलझ जाती हैं कि मतदान करने ही नहीं जा पाती हैं। हमें मतदान बढ़ाने के लिए जागरूकता बढ़ानी चाहिए। अखबार इसमें अहम भूमिका निभा रहे हैं। -चंद्रिका अग्रवाल, कत्थक नृत्यांगना
राजनीति में बदलाव बेहद जरूरी है। इसमें दो तरह के लोग हैं। एक वो जो जनता के हमेशा आगे रहेगा दूसरा वो जो जनता के पीछे चलेगा। आगे चलने वाला सिर्फ अपना व समर्थकों का भला करता है। पीछे चलने वाला सबको साथ लेकर चलता है। ग्रामीण क्षेत्र में अधिकांश महिलाएं अशिक्षित हैं उन्हें शिक्षित करने व मतदान के प्रति जागरूक करना जरूरी है। - श्वेता शर्मा, सामाजिक कार्यकर्ता
मतदान के दिन महिलाएं केवल उसे छुट्टी के रूप में न मनाएं, बल्कि मतदान के लिए घर से निकलें। मजबूत प्रत्याशी व सरकार के गठन के लिए जागरूक बनें। -निरूपमा सिंह, एनजीओ संचालिका
नारी सशक्तिकरण के नाम बड़ी बड़ी बातें की जाती हैं, लेकिन क्या कभी हम अपने हक की बात करते हैं ? पहले हमें खुद को जागरूक बनना होगा। सवाल उठता है कि राजनीति में महिलाएं आगे क्यों नहीं आ रहीं हैं। इसके लिए पहले हमें सक्षम बनना हो, फिर आगे बढ़ना होगा। -नीलू दीवान, सामाजिक कार्यकर्ता
जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की हालत बहुत खराब है। आम आदमी को सरकारी अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं को पाने के लिए सिफारिश की जरूरत पड़ती है। यहां तैनात स्टाफ व चिकित्सक जुगाड़ वालों को पहले सेवाएं उपलब्ध कराते हैं। ऐसा नहीं होना चाहिए। -मनीषा वार्ष्णेय, सामाजिक कार्यकर्ता
सांसद उच्च शिक्षित होना चाहिए। शिक्षा एक ऐसी चीज है जो हमारे स्तर को ऊंचा रखने का कार्य करती हैं। गांवों में शिक्षा का अभाव है। इसके चलते तमाम बच्चे स्कूल पढ़ने नहीं जा पाते। बच्चियों की असुरक्षा की भावना है। महिला सुरक्षा के लिए कई कड़े कदम उठाए गए हैं। और कड़े कानून और कदम उठाने की जरूरत है। -आकांक्षा मारवाह, सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर।
चुनाव के समय नेता जनता के बीच तो दिखते हैं, लेकिन इसके बाद वे पलटकर तक नहीं देखते हैं। ऐसा नहीं होना चाहिए। हमें देश के जिम्मेदार मतदाता के रूप में भूमिका अदा करना चाहिए। अवकाश न मनाएं, मतदान जरूर जाएं। - दीपशिखा चौधरी, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर।