आशीष श्रीवास्तव
मंडी परिसर के बाहर खाद्यान्न खरीद पर मंडी टैक्स खत्म किए जाने की व्यवस्था ने आढ़ती व पल्लेदारों की समस्या बढ़ा दी है। खुद मंडी को भी राजस्व हानि हो रही है। बाहर से खरीद होने के कारण ढाई माह में अलीगढ़ मंडल में करीब दो करोड़ के मंडी शुल्क का नुकसान हुआ है।
5 जून 2020 को आए अध्यादेश में फूड कंपनियों व बिचौलियों को मंडी से बाहर खरीद करने की अनुमति मिल गई थी। मंडी के बाहर इन कंपनियों को मंडी शुल्क नहीं चुकाना होता, जब कि परिसर में ढाई प्रतिशत मंडी टैक्स लगता है। इस बदली व्यवस्था का फायदा उठाते हुए फूड कंपनियों और बिचौलियों ने किसानों से बड़े पैमाने पर खरीद शुरू कर दी है। धान खरीद में नरेना के बाद प्रदेश की दूसरी सबसे बड़ी मंडी धनीपुर है, यहां यह स्थिति साफ देखी जा सकती है। धनीपुर मंडी में पिछले साल सितंबर माह के दूसरे सप्ताह से प्रतिदिन करीब 800 से एक हजार बोरा धान एक आढ़ती खरीद लेता था। इस सीजन में यह संख्या घट कर 400 से 500 बोरा तक रह गई है। इससे आढ़ती हताश हैं तो मंडियों में काम करने वाले पल्लेदार व उनके परिवार भुखमरी के कगार पर हैं।
अब किससे उधार लेगा किसान
किसान नेता नवाब सिंह ने कहा कि अब तक किसान शादी अथवा अन्य जरूरतों के लिए आढ़तियों से संबंधों के आधार पर उधार रुपये ले लेता था। अब किससे लेगा। फसल बेचने पर उसे रुपये मिलने की गारंटी कौन देगा। एसडीएम कितनों का भुगतान कराएंगे। बताते चलें नई योजना में खरीदार को 72 घंटे में रुपये किसान को देना है। न देने पर उस पर 25 हजार से पांच लाख तक जुर्माना लग सकता है।
अध्यादेश से बढ़ी यह मुश्किलें
- मंडी में माल की आवक में 50 फीसदी की कमी।
- मंडी के बाहर थोक, फुटकर, मिल आदि मंडी प्रशासन के नियंत्रण से हुए बाहर।
- किसान पर मंडी में माल लाने की अनिवार्यता समाप्त।
- बड़ी बड़ी कंपनियों व बिचौलियों ने क्लस्टर बनाकर माल खरीद शुरू की।
- अब तक बाहर खरीद करने पर मंडी प्रशासन को छापे मारने व शुल्क वसूलने का था अधिकार।
नए अध्यादेश से मंडी में माल की आवक 50 प्रतिशत तक कम हुई है। अकेले धनीपुर मंडी में ढाई माह में करीब एक करोड़ का घाटा हुआ है।
सुरेशचंद्र लोधी, अध्यक्ष, गल्ला व्यापारी कल्याण समिति
नए कानून के बाद मंडी के बाहर फसलों की खरीद पर नियंत्रण न रहने से मंडी शुल्क आधा रह गया है। पहले समूचे मंडल से करीब चार करोड़ रुपये मंडी शुल्क प्रति वर्ष मिलता था। हालांकि लक्ष्य 60 प्रतिशत होने से राहत मिली है। अब तक 95 प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त हो गया है।
एनके मालिक, डीडी मंडी