जिले के सबसे मशहूर डिग्री कॉलेजों में जहां दाखिलों के लिए बड़ी-बड़ी सिफारिशें लगाई जाती हैं, वहां सामान्य श्रेणी के दस फीसदी आरक्षण की 140 सीटें खाली रह गईं। अब दाखिले वाली मेरिट निकल चुकी है, इसलिए इसमें कुछ होने की गुंजाइश बहुत कम है। इस बात में भी कोई हैरत नहीं है कि शायद ही इसका प्रचार प्रसार भी हुआ हो, क्योंकि अगर ऐसा होता तो निश्चित रूप से ये सीटें भर गई होती।
आरक्षण को लेकर होने वाली सियासी हलचल, पुन: समीक्षा की मांग करने वाले लोग, इसको लेकर गाहे-बगाहे होने वाले छात्र आंदोलन, छात्र नेता, प्रबंधन, शासन या प्रशासन, किसी ने दाखिलों से पहले इसको लेकर कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं की। क्योंकि अगर ऐसा होता तो निश्चित रूप से उन लोगों को फायदा मिलता, जो इसके सच्चे हकदार थे। शहर के प्रतिष्ठित कालेजों में शुमार श्री वार्ष्णेय महाविद्यालय और धर्म समाज महाविद्यालय प्रबंधन ने दाखिले की मेरिट जारी कर दी है, जिसमें दस प्रतिशत सामान्य श्रेणी कोटे की सीटों पर एक भी आवेदन नहीं है। श्री वार्ष्णेय कालेज में दस प्रतिशत कोटे के हिसाब से बीकॉम में 12, बीएससी में 16 और बीए में 38 सीटें हैं।
वहीं डीएस कालेज में बीकॉम में 10, बीएससी में 32 और बीए में 32 सीटें हैं। यह वह सीटें हैं, जिनमें सामान्य श्रेणी का आरक्षण है, लेकिन किसी ने आवेदन नहीं किया तो अनारक्षित सामान्य श्रेणी के आवेदकों को यह सीटें आवंटित की जा रही हैं। यहां सवाल उठता है कि क्या सामान्य आरक्षित श्रेणी के युवा इस व्यवस्था से अंजान हैं। अगर ऐसा है तो निश्चित ही उन्हें जागरूकता की आवश्यकता है।
कोई भी आवेदन दस प्रतिशत आरक्षित श्रेणी में नहीं आया है। यह जागरूकता के अभाव की वजह से भी हो सकता है। युवाओं को इस संबंध में जागरूक होना चाहिए।
- डॉ. हेमप्रकाश, प्राचार्य डीएस कालेज।
आरक्षण में सामान्य जाति के पिछड़ा वर्ग लोगों के लिए दस प्रतिशक कोटा निर्धारित है। आवेदन नहीं आया, इसीलिए इस श्रेणी में मेरिट जारी नहीं हुई है। अगर आवेदन आता तो निश्चित ही पात्र लाभार्थियों को लाभ दिया जाता।
- डॉ. पंकज कुमार वार्ष्णेय, प्राचार्य डीएस कालेज।
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डॉ. पंकज कुमार वार्ष्णेय, प्राचार्य एसवी कालेज- फोटो : CITY OFFICE