प्रदेश सरकार की विधानसभा चुनाव से पहले ग्राम सचिवालयों को आधुनिक बनाने की योजना जिले में परवान नहीं चढ़ पा रही है। जिले के 867 ग्राम पंचायतों में से अधिकांश गांवों में अभी तक मिनी सचिवालय न तो चालू हुए हैं और न ही वहां फर्नीचर, कंप्यूटर आदि की व्यवस्था हो सकी है। ऐसे में पंचायत सहायकों को जिस उद्देश्य से नियुक्त किया गया है, वह पूरा ही नहीं हो पा रहा है।
ग्राम पंचायतों में सहायकों की नियुक्ति हो चुकी है। इन्हें प्रशिक्षण देकर उनका काम भी अच्छी तरह से समझा दिया गया है। पंचायत सहायकों को मुख्य काम ग्राम पंचायतों का लेखा-जोखा तैयार कर पंचायत की सभी जानकारी ऑनलाइन करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके लिए पंचायत घर में एक कक्ष बनाया गया है। यहां पंचायत सहायक के अलावा प्रधान व सचिव का भी अलग-अलग कक्ष होगा। इन सभी के एक साथ पंचायत घर में बैठना शुरू होने के बाद शासन का ग्राम सचिवालय बनाए जाने का सपना पूरा होगा। लेकिन विधानसभा चुनाव से पहले शासन की मंशा पूरी होती नहीं दिख रही है। अधिकांश ग्राम पंचायतों में अभी तक कंप्यूटर लगाए जाने के साथ ही फर्नीचर स्थापित करने का काम शुरू ही नहीं हो सका है। कुछ गांवों में फर्नीचर भी खरीदा गया है, लेकिन अन्य ग्राम पंचायतों में अभी ग्राम सचिवालय चालू नहीं हो सके हैं। कंप्यूटर खरीद होने के बाद ही पंचायत सहायकों का काम शुरू होगा। ऐसे में पंचायत सहायक अभी दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं। सरकार को उनको बिना काम के ही मानदेय देना पड़ रहा है। जिला पंचायत राज अधिकारी धनंजय जायसवाल ने बताया कि पंचायत सहायकों के लिए सभी ग्राम पंचायतों में बैठने के लिए व्यवस्था की जा रही है। उन्होंने बताया कि कुछ ग्राम सचिवालयों में काम होने लगा है। इन गांवों में पंचायत सहायकों को एक कंप्यूटर और फर्नीचर भी दिला दिया गया है। कुछ ग्राम पंचायतों में ग्रामीणों को सेवाएं भी मिलने लगी हैं, जहां दिक्कत आ रही है, वहां भी जल्द ही ग्राम सचिवालयों को चालू कराने के लिए प्रयास हो रहे हैं।