ब्लॉक प्रमुख पद के मतदान के दिन जिले में एकमात्र गंगीरी ब्लॉक पर वोट पड़े, विजयी वीरबती देवी का खेमा मतदान के वक्त सपाई था और शाम को भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं एटा सांसद राजू भैया का आशीर्वाद लेकर कुछ और हो गया।
बृहस्पतिवार को नामांकन के दौरान वीरबती के परिजनों ने स्पष्ट रूप से खुद को निर्दलीय बताया। नाम वापसी के दिन तक वो निर्दलीय रहे। मतदान के दिन सुबह वह कुछ देर के लिए सपाई बने, जब तक वोट पड़ना था। जीत जाने के बाद वह सपा की पूरी टीम को कलक्ट्रेट में गच्चा देकर अकेले ही प्रमाण पत्र लेने डीएम के पास पहुंच गए।
प्रमाण पत्र लेने के बाद भी जब वो पूरी तरह से संतुष्ट नहीं हुए तो राजू भैया का आशीर्वाद लेने मैरिस रोड आ गए। वहां से आशीर्वाद लेकर वो वापस हुए। जब राजू भैया से मुलाकात का ये फोटो सपा जिलाध्यक्ष गिरीश यादव को भेज कर पुष्टि कराई गई तो उन्होंने कुछ देर के लिए अपना माथा पकड़ लिया।
उसके बाद बोले.. मैं हैरान हूं। आखिर ऐसी क्या मजबूरी थी कि वीरबती के परिजनों को भाजपा नेताओं का आशीर्वाद लेना पड़ गया। उन्होंने कहा कि बीते कुछ दिनों में राजनीति में ऐसे नेताओं का उदय हुआ, जो थोड़ा सा भी दबाव नहीं झेल पाते हैं। ऐसे नेताओं को कम से कम सक्रिय राजनीति में नहीं आना चाहिए।
बोले.. जिला पंचायत अध्यक्ष पद को लेकर उन पर भी काफी दबाव बनाया गया, लेकिन वो डिगे नहीं। सपा प्रत्याशी का नामांकन भी कराया और मतदान भी कराया। मतदान में वही लोग भाजपा के खेमे में गए जो दबाव नहीं झेल पाए। ऐसे लोगों को जनता के साथ धोखा करने का कोई हक नहीं है। उन्होंने कहा कि वह पूरे प्रकरण से सपा आलाकमान को अवगत करा रहे हैं।