9 फरवरी 1873 को बनारस में सर सैयद ने कहा था कि ‘कोई मदरसा नहीं बना रहे, कोई कॉलेज नहीं बना रहे, बल्कि हम भविष्य की यूनिवर्सिटी बनाने का ख्वाब देख रहे हैं। भविष्य की यूनिवर्सिटी वहां बनाऊंगा, जहां की आबोहवा सबसे बेहतर हो
बनारस में न्यायाधीश के पद पर तैनात रहे सर सैयद अहमद ने अपने मित्रों से कहा था कि वह ऐसी जगह यूनिवर्सिटी बनाएंगे, जहां न तो बाढ़ आए और न ही अकाल पड़े। इसके बाद ऐसी जगह की तलाश शुरू हुई। मंथन के बाद अलीगढ़ को चुना गया। अलीगढ़ से गंगा-यमुना नदी काफी दूर हैं और यहां भूमिगत जलस्रोत 20 फुट के नीचे थे, इसलिए बाढ़ और अकाल से यह शहर अछूता था।
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9 फरवरी 1873 को बनारस में सर सैयद ने कहा था कि ‘कोई मदरसा नहीं बना रहे, कोई कॉलेज नहीं बना रहे, बल्कि हम भविष्य की यूनिवर्सिटी बनाने का ख्वाब देख रहे हैं। भविष्य की यूनिवर्सिटी वहां बनाऊंगा, जहां की आबोहवा सबसे बेहतर हो’। एएमयू के उर्दू एकेडमी के पूर्व निदेशक डॉ. राहत अबरार ने बताया कि सर सैयद ने उस वक्त अलीगढ़ के सिविल सर्जन आर जैक्सन, कलेक्टर हेनरी जार्ज लॉरेंस व पीडब्ल्यूडी के इंजीनियर हंट की कमेटी बनाई, जिन्हें अलीगढ़ की भौगोलिक स्थिति जानने के लिए जिम्मेदारी सौंपी। कमेटी ने यहां की आबोहवा बेहतर बताई। उन्होंने 1875 में मदरसा तुल उलूम के रूप में रखी थी। 1877 में यही मदरसा मोहम्मडन एंग्लो ओरिएंटल कॉलेज वजूद में आया। वर्ष 1920 में कॉलेज से विश्वविद्यालय बन गया।