अब नीम से सब्जियों में लगने वाली बीमारियों का भी इलाज होगा। भिंडी, टमाटर, बैंगन, गाजर, मूली, लौकी, मिर्च के पौधे की जड़ों में लगने वाले जड़गांठ रोग के इलाज का देसी नुस्खा एएमयू के वनस्पति विभाग के छात्रों ने पांच साल के शोध में ढूंढ निकाला है। नीम की पत्ती और राख का मिश्रण बनाकर पौधे की जड़ में डालने से यह रोग काफी हद तक खत्म हो रहा है। शोध के अनुसार इससे फसलों की पैदावार में भी इजाफा हो रहा है।
जड़गांठ रोग एक सूत्रकृमि जनित रोग है। इस रोग से पौधे की जड़ों में गांठे बन जाती हैं। जिससे पौधे की बढ़वार रुक जाती है और पीले पड़ जाते हैं। कई बार पौधे सूखने भी लगते हैं। सब्जियों की फसल में इस रोग का प्रकोप ज्यादा होता है। अब एएमयू के वनस्पति विभाग ने एक ऐसा देसी नुस्खा तलाश लिया है जो इस रोग पर नियंत्रण कर रहा है। पांच साल तक चले शोध में इसके अच्छे नतीजे भी आए हैं। वनस्पति विभाग के अध्यक्ष प्रो. अबरार अहमद खान के निर्देशन में शोधार्थी आदिल खान भट्ट, मोहम्मद हारिस ने शोध में पाया कि सूत्रकृमि फसलों की जड़ में घुसकर उसमें गांठ बना देते हैं, जिससे पत्तियां मुरझाने लगती हैं। इससे 40 फीसदी उत्पादन घट जाता है।
जड़ गांठ सूत्रकृमियों पर नियंत्रण पाने के लिए मेरे शोधार्थियों ने शोध किए। उन्हें जबर्दस्त सफलता मिली। फसलों का उत्पादन बढ़ेगा। जड़ों में जो राख, नीम और अखरोट की पत्तियां इस्तेमाल की गई हैं, वह पर्यावरण के अनुकूल है। जड़ गांठ से 40 फीसदी उत्पादन कम हो जाता है। - प्रो. अबरार अहमद खान, अध्यक्ष, वनस्पति विभाग, एएमयू
जड़ वाली फसलों की जड़ में सूत्र कृमियों के घुसने से उत्पादन पर असर पड़ता है। धीरे-धीरे फसलों की पत्तियां मुरझाने लगती हैं। फलों का विकास रुक जाता है। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। जड़ों से जो फलों को पोषक मिलते हैं, उसे सूत्रकृमि खा जाते हैं, जिससे उत्पादन कम हो जाता है। - बलजीत सिंह, उप निदेशक, कृषि उद्यान