श्रीगणेश-लक्ष्मी, माता दुर्गा जी, श्रीराम परिवार, हनुमान जी, कुबेर जी, श्रीयंत्र, दीपक, मंदिर, सिंहासन, घंटी और पूजा पाठ के सजावटी सामान देश के कई हिस्सों व विदेश में सप्लाई हो रहा है।
यहां तक सप्लाई
दिल्ली, मध्य प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, कर्नाटक के अलावा यूपी के कई शहरों में मूर्ति की आपूर्ति होती है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी मूर्तियां बिक रही हैं। दुबई, कनाडा, अमेरिका, इंग्लैंड, जर्मनी, फ्रांस, सिंगापुर में रहने वाले भारतीयों के बीच भी इनकी मांग है।
सालाना कारोबार एक नजर में
- 1000 करोड़ रुपये सालाना है पीतल मूर्ति का कारोबार
- 500 करोड़ रुपये सालाना का है निर्यात
- 35 निर्यातक विदेशी बाजार में बेचते हैं पीतल मूर्ति
- 50 बड़े पीतल मूर्ति के हैं निर्माता
- 50 हजार लोगों की जुड़ी है रोजी रोटी
- 500 ढलाई व मेन्युफैक्चरिंग यूनिट
- 100 करोड़ रुपये का विदेशी बाजार से आर्डर का अनुमान
- 900 रुपये किलो तक से 1300 रुपये किलो तक
- सुपर फाइन की कीमत 1100 से 1300 किलो तक
- सामान्य मूर्तियों की कीमत 900 रुपये किलो तक
कच्चे माल की कीमत दे रही सिरदर्द
बाजार में काफी उछाल है। विदेशी ऑर्डर भी लगातार आ रहे हैं। वायर संपर्क कर रहे हैं। विदेशी वायर तो दीपावली से आगे क्रिसमस तक के ऑर्डर भी बुक करा रहे हैं लेकिन कच्चे माल की कीमतों में अस्थिरता निर्यातक तथा निर्माताओं को दिक्कत दे रही है। लगातार उतार चढ़ाव के चलते वे परेशान हैं। वायर को बांधे रखने के लिए वे उतार-चढ़ाव झेलने को तैयार हैं। स्थितियां ये हैं कि पिछले वर्ष की अपेक्षा पीतल की कीमत में 100 रुपये किलो का इजाफा है। पिछले एक माह में ही पीतल में 60 रुपये बढ़े हैं।
पिछले वर्ष था 100 करोड़ का कारोबार
पिछले साल अलीगढ़ में मूर्ति कारोबार 100 करोड़ के करीब था। निर्यातक सुशील मित्तल का कहना है कि पीतल के रेट तो बढ़ रहे हैं लेकिन मूर्ति की मांग भी खूब है। दिवाली पर हर कोई अपने घर में भगवान की मूर्ति लाना चाहता है।
तीन साल से लगातार बढ़ रहे पीतल के दाम
- 2023 में 495 रुपये किलो
- 2024 में 525 रुपये किलो
- 2015 में 600 रुपये किलो