हाईवे के लुटेरों संग यह रीयल मुठभेड़ किसी शतरंज की बिसात से कम नहीं। करीब दस दिन से हाईवे बाईपास पर ताबड़तोड़ दिनदहाड़े लूटों से पुलिस-पब्लिक की नाक में दम था। हर लूट में एक जैसी कदकाठी और हुलिया के लुटेरे सामने आ रहे थे। अब चार दिन से तो बाइक भी वही थी, जो लूटी गई और उस बाइक की नंबर प्लेट तक नहीं बदली गई।
बस बदमाशों की स्टेटेजी से ढाई घर आगे चलते हुए पुलिस ने घेराबंदी कर दी और एक लुटेरा पुलिस की गोली से जख्मी होने के बाद हत्थे चढ़ गया। अब तक उसने तीन घटनाएं तो स्वीकार ली हैं और चौथी को लेकर संदेह जताया है। फिलहाल पुलिस उसके फरार दो साथियों तक पहुंचने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाए हुए है।
खेरेश्वर चौराहा फोकस कर बनी रणनीति
हाईवे के लुटेरों का केंद्र लोधा इलाके में खेरेश्वर चौराहा ही था। यहां से गभाना और बौनेर तक व कभी-कभी मडराक से आगे निकलकर सासनी तक भी हाथ मार रहे थे। 28 मई को जब स्पलेंडर-प्रो बाइक का नंबर बिना बदले लूट की बात सामने आई तो पुलिस ने भी छूट दी और यही तय किया कि आगे किसी घटना पर ही घेरा जाएगा। इसके चलते खुद एसओ लोधा विनोद पवार, सर्विलांस/एसओजी टीम के रवि त्यागी आदि इन बदमाशों की रैकी में लगे थे। चौकी इंचार्ज खेरेश्वर दिन में चौराहे पर संदिग्धों की रैकी में लगे थे। इस दौरान पुलिस ने हाईवे के आसपास के उन सुनसान इलाकों का भी पता लगाया, जहां असामाजिक या आपराधिक तत्व अक्सर शरण पाते हैं। उनके भागने के रास्तों तक को पुलिस ने सर्च किया। इसमें घूम फिर कर रसूलपुर से गगन स्कूल होते हुए पुराने बाईपास को जोड़ने वाला रास्ता और उसके पास के प्लाटों की बाउंड्री ही बताई गई। बस बुधवार को मौका मिल गया।
20 मिनट में ऑपरेशन, बचे चौकी इंचार्ज
इन लुटेरों को लेकर सर्विलांस/एसओजी टीम को सुबह से ही लोकेशन भ्रमणशील मिली थी। इस पर यह टीम खुद इंचार्ज रवि त्यागी के साथ हाईवे पर मथुरा-हाथरस और कानपुर की ओर अलर्ट थी। खेरेश्वर चौराहे पर एसओ लोधा व चौकी इंचार्ज थे, जबकि गभाना की ओर एसओ गभाना मो. असलम अलर्ट थे। दोपहर 2 बजे जैसे ही लूट की सूचना प्रसारित हुई, तभी सभी टीमें हरकत में आ गईं। पहले पता चला कि बदमाश खैर की ओर दौड़ रहे हैं। मगर वह खेरेश्वर चौराहे से पहले नादा पुल के रास्ते गगन पब्लिक स्कूल की ओर आ गए। इस पर एसओ उनके पीछे थे, जबकि सामने से चौकी इंचार्ज धर्मेंद्र रसूलपुर होकर निकले। कुल मिलाकर अगले 15 मिनट में पुलिस व बदमाश आमने-सामने थे। बदमाशों ने पहले पुलिस को गालियां देना शुरू किया। फिर फायरिंग कर दी। इस फायरिंग में चौकी इंचार्ज बच गए। बाद में चौकी इंचार्ज ने एसओ के इशारे पर बाउंड्री की ओट से फायरिंग की, जिसमें एक गोली अक्षय को लगी। मगर दो साथी फायरिंग करते हुए निकल गए। इस पर सारसौल की ओर से एसओ गभाना के अलावा एसओ बन्नादेवी विनोद यादव ने घेराबंदी की। बदमाश एक बाइक सवार को गिराते हुए गलियों में खो गए। इसी बीच एसओ सासनी गेट विनोद कुमार, एसओ देहली गेट अनुज कुमार, एसओ गांधीपार्क संजय पांडेय ने भी पहुंचकर सारसौल को घेरा और काफी देर तक तलाश चली। मगर बदमाश नहीं मिले। तब तक लोधा पुलिस ने घायल बदमाश को अस्पताल भेज दिया। इसी बीच सूचना पर एसएसपी के अलावा एसपी सिटी अतुल श्रीवास्तव, सीओ द्वितीय सोमदत्त, सीओ गभाना सत्यप्रकाश, सीओ प्रथम राजकुमार, फॉरेंसिक टीम भी पहुंच गई।
मौके से मिला यह माल
पुलिस ने मौके से 23 मई को लूटी गई इन लूटों में प्रयुक्त बाइक स्पलेंडर प्रो के अलावा तमंचा, कारतूस, एक ईयरफोन आदि भी बरामद किया है।
बदमाश मरने की फैली खबर
बेशक मुठभेड़ स्थल बेहद सुनसान रहता है। मगर कच्चे रास्ते पर लोगों की आवाजाही रहती है। उधर पुलिस की भागदौड़ व फायरिंग देख भी लोगों में अफरातफरी का माहौल था। जब गोली चलने के बाद पुलिस भागते दो बदमाशों के पीछे हुई तो लोगों में बदमाश के मरने की खबर फैल गई और लोगों का मौके पर पहुंचना शुरू हो गया।
लूट पीड़ितों को पहुंचाया थाने
कंट्रोल रूम पर सूचना देने वाली महिलाओं से लैपर्ड ने पहुंचकर पूरी जानकारी ली। जब लैपर्ड को बदमाशों की घेराबंदी की खबर वायरलेस पर मिली तो वह बिना समय गवाएं दोनों महिलाओं को थाने ले गए। हालांकि महिलाओं की जिद थी कि उन्हें हाथरस जाना है। मगर लैपर्ड कर्मियों ने किसी झमेले से बचने के लिए उन्हें थाने पहुंचाया। जहां उनसे लूट की तहरीर लेकर मुकदमा दर्ज कराया और बाद में एसएसपी ने भी उनसे पहुंचकर वार्ता की।
तीन माह से धंधे से दूर था लुटेरा
पुलिस मुठभेड़ में जख्मी लुटेरे अक्षय का पिता जलालपुर में ही छोले-भटूरे की दुकान चलाता है। खुद अक्षय भी उस दुकान पर बैठा करता था। मगर अब पिता की मानें तो तीन माह से उसका बेटा गलत संगत में था। खुद वह दुकान पर नहीं बैठता था। कहां जाता और कहां आता था, कुछ पता नहीं रहता था। गलत संगत का अंदेशा बाप को था। उसके खर्चे भी बढ़ गए थे।