महानगर के आगरा रोड स्थित हाथरस अड्डा पर शनिवार सुबह-सुबह भीषण अग्निकांड करीब ढाई दशक पुराना टेंट हाउस राख हो गया। यहां आग करीब 3 घंटे के प्रयास के बाद बुझाई जा सकी। इस दौरान इलाके में अफरा-तफरी मची रही। टेंट हाउस के आग बुझाने वाले सिलेंडर फेल हो गए। इसके चलते यहां सबकी सांसें अटकी रही। तमाम लोग आग बुझाने में जुटे रहे। 2 छोटी और 3 बड़ी दमकलें भी लग गईं, तब जाकर आग को शांत किया जा सका। सुबह 8 बजे से लगी आग 11 बजे जाकर बुझ सकी।
हाथरस अड्डे का कुछ हिस्सा गांधीपार्क क्षेत्र में है। यहीं गांधी पार्क वाली पट्टी पर चार माले की दुकानों में करीब ढाई दशक से वर्षों से योगेश गुप्ता निवासी महेंद्र नगर का योगेश टेंट हाउस है। शनिवार सुबह टेंट हाउस की इसी चार माले की बिल्डिंग में भीषण आग लग गयी। पड़ोसियों ने सुबह 8 बजे योगेश गुप्ता को इसकी सूचना दी कि टेंट हाउस के अंदर से धुआं निकल रहा है। योगेश तुरंत मौके पर पहुंचे तब तक धुआं लपटों में तब्दील हो चुका था।
यह क्षेत्र बेहद संकरा है। मौके पर जमा भीड़ आग बुझाने के अपने अपने प्रयासों में जुट गई। योगेश भी टेंट हाउस के पांचों सिलेंडरों से आग बुझाने का प्रयास करने लगे। लेकिन यहां सारे प्रयास शुरू में विफल साबित हुए। बल्कि आग टेंट हाउस के पहले माले से चौथे माले तक जा पहुंची। आनन-फानन पुलिस पहुंची और दमकलें भी जुटने लगीं। पुलिस ने अफरा तफरी पर काबू रखने का प्रयास किया। तब भी 3 घंटे लगातार आग ने अपना कहर बरपाया। करीब 11 बजे जाकर आग की लपटें शांत हो सकीं।
आग बुझाने में 3 बड़ी दमकलों सहित 2 छोटी दमकलें खाली हो गईं। अग्निकांड में टेंट हाउस की सिर्फ बिल्डिंग खड़ी रह गयी है, अंदर रखा कई लाख का सामान राख हो गया। कुछ सामान बचा पूरा नहीं जल पाया है तो वो आधा जला भी किसी काम का नहीं रह गया है। वहीं टेंट स्वामी और उनके परिवार का बुरा हाल है। योगेश गुप्ता ने बताया कि ढाई दशक से टेंट हाउस चला रहे हैं। चारों माले में टेंट हाउस का सामान था। कई लाख का सामान था, सब खत्म हो गया।
आग का कारण
योगेश गुप्ता ने बताया कि वो अभी इस हालत में नहीं हैं कि आग के कारण खोज सकें। लेकिन कारण कोई भी हो सकता है। हो सकता है शार्ट सर्किट से आग लगी हो। इससे ज्यादा संभावना टेंट हाउस वाले कपड़ों में हीट बनने से आग लगने की है। जानकार बताते हैं कि टेंट हाउस में कपड़ों का बड़ा स्टोर होता है। तापमान बहुत है, हो सकता है कि कपड़े हीट होने से जल उठे हों। इन कपड़ों में टेरीकॉट का ज्यादातर इस्तेमाल होता है। टेंट के काम में कुछ कपड़ों में चिकनाई आम बात है। ज्यादा तापमान पर ये कपड़े भी ज्वलनशील बन जाते हैं। पहले भी कपड़ों में ज्वलनशीलता से आग की घटनाएं हुई हैं। इस घटना ने भी यही संभावना अधिक है।
आग को रास्ता मिल जाता तो
ये तो शुक्र है कि टेंट हाउस जिस बिल्डिंग में था वो बिल्डिंग तीनों साइड से बंद थी। आग भी इसी कैंपस में रही। वरना आग को बाहर निकलने का रास्ता मिल जाता तो आसपास बड़ी अनहोनी भी संभव थी।
आग लगने का कारण शार्ट सर्किट ही माना गया है। तमाम प्रयास के बाद आग को नियंत्रित किया जा सका है। बाकी नुकसान का अनुमान टेंट हाउस स्वामी ही बता पाएंगे।
-संजय जायसवाल एफएसओ