अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के भूगोल विभाग द्वारा संभावना व्यक्त की जा रही है कि इस बार सर्दियों में उत्तर भारत में कोहरा घना और अधिक समय तक छाया रह सकता है। इसकी वजह वातावरण में आर्द्रता की बढ़ी मात्रा और धूल कणों द्वारा सर्दियों में अतिरिक्त आर्द्रता को बाहर करना बताई जा रही है।
भूगोल विभाग के चेयरमैन डॉ. अतीक अहमद कहते हैं कि उत्तर भारत में इस बार आर्द्रता बढ़ी है। जब सर्दियों में तापमान कम हो जाएगा तो न्यूक्टीयार्ड डस्ट की सोखी हुई ज्यादा नमी बाहर आ जाएगी। न्यूक्टीयार्ड डस्ट पानी, गैस और धूल से बने होते हैं। जमीन ठंडी होने से जमीन और वातावरण के बीच में यह एक परत के रूप में मौजूद रहेगी।
अगर जमीन की सतह गरम होती तो बारिश की संभावना बन जाती है लेकिन सर्दियों में जमीन की सतह ठंडी रहती है इसलिए यह कोहरे को वातावरण में लंबे समय तक कायम रखेगी। जैसे जैसे तापमान में वृद्धि होगी यह स्थिति भी कम होती जाएगी।
डॉ. अहमद कहते हैं कि मौसम के बदलने के क्रम में भी पिछले कुछ दशकों में बदलाव हुआ है। इस समय दिसंबर में खासी सर्दी पड़नी चाहिए थी लेकिन देखा जा रहा है कि अभी कड़ाके की सर्दी नहीं है जबकि दिसंबर का 30 फीसदी हिस्सा गुजरने को है।