चकबंदी हुई तो भाई-भाई का हो जाएगा दुश्मन
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नहीं साहब! हमें गांव में चकबंदी नहीं चाहिए...। चकबंदी हुई तो भाई-भाई का दुश्मन हो जाएगा। गांव वालों ने यहां तक कह दिया कि चकबंदी हुई तो हम खुलेआम लुटेंगे। हम बगैर चकबंदी के ही अच्छे हैं। हमें अपने गांव में चकबंदी नहीं चाहिए...। यह एक-दो अथवा दस-बीस नहीं बल्कि 11 गांवों के हजारों लोगों की आवाज है जो अपने गांव में चकबंदी के विरोध में उतर आए हैं। शुक्रवार को ग्राम पंचायत कनोवी के गांव गोसपुर के पंचायत घर पर चकबंदी विभाग के कानूनगो अमर सिंह एवं लेखपाल बाबूलाल ने बैठक बुलाई थी जिसमें एक स्वर से चकबंदी का विरोध उभरा।
कानूनगो एवं लेखपाल ने ग्रामीणों को समझाया कि चकबंदी से किसी को नुकसान नहीं है। चकबंदी में रास्ता, दबी हुई जमीन निकाली जायेगी। ग्राम प्रधान पति राजेंद्र सिंह ने बताया कि सभी गांव के लोगों ने चकबंदी से साफ साफ इंकार कर दिया। ग्राम पंचायत के 11 गांव हैं। कोई गांव चकबंदी नहीं चाहता। बैठक में छोटे सिंह, राम निवास, सोनपाल सिंह, महावीर सिंह, रामचंद्र सिंह, गंगा सिंह, महेश, लाल सिंह, भगवती प्रसाद, प्रेमपाल सिंह, रूप सिंह, चौधरी, पप्पू सिंह सहित 11 गांव के लोग मौजूद थे।